रेलवे में फिर उभरेगा साहिबगंज, डिपो से लेकर राजधानी तक विकास की नई रफ्तार, जल्द बनेगा 24 बोगी का पिट लाइन
“कभी स्टीम इंजन के लोको सेट के लिए पहचान रखने वाला साहिबगंज अब चार दशक बाद फिर से रेलवे के नक्शे पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर बढ़ रहा है. इंटीग्रेटेड मेंटेनेंस डिपो के निर्माण की योजना इस बदलाव की सबसे बड़ी कड़ी मानी जा रही है”

साहिबगंज से अमान की रिपोर्ट
sahibganj: कभी स्टीम इंजन के लोको सेट के लिए पहचान रखने वाला साहिबगंज अब चार दशक बाद फिर से रेलवे के नक्शे पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर बढ़ रहा है. इंटीग्रेटेड मेंटेनेंस डिपो के निर्माण की योजना इस बदलाव की सबसे बड़ी कड़ी मानी जा रही है, जहां डीएमयू, मेमू और ईएमयू सहित सभी प्रकार के कोचों की मरम्मत की जाएगी. शनिवार को हावड़ा जोन के प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर परमानंद शर्मा और मालदा मंडल के एडीआरएम अमरेंद्र कुमार मौर्य ने झरना कॉलोनी स्थित डीएमयू मेंटेनेंस शेड का निरीक्षण किया. इस दौरान 24 कोच के लिए 368 मीटर लंबी पिट लाइन के प्रस्तावित स्थल का जायजा लिया गया. अधिकारियों ने बताया कि इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा जा चुका है और वर्ष 2027 तक मेंटेनेंस कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है.
फिलहाल उपलब्ध जमीन पर 16 कोच की पिट लाइन ही संभव है, लेकिन अतिरिक्त भूमि मिलने पर इसे 24 कोच तक विस्तारित किया जाएगा. डिपो के सुचारू संचालन के लिए 10 से 20 अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती और आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी. रेलवे के विकास की रफ्तार का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एक समय साहिबगंज से राजधानी ट्रेनों का परिचालन नहीं होता था, जबकि आज यहां से दो राजधानी एक्सप्रेस का संचालन हो रहा है. वहीं पश्चिम रेलवे फाटक पर पुल निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है, जिससे यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है.
अमृत भारत योजना के तहत साहिबगंज रेलवे स्टेशन को किला-नुमा भव्य स्वरूप दिया गया है, जिससे स्टेशन की पहचान और भी मजबूत हुई है. निरीक्षण के दौरान ईपी ब्रेक कंट्रोलर टेस्टिंग सुविधा का उद्घाटन भी किया गया और परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया. कर्मियों ने शेड परिसर में बाथरूम निर्माण और फाटक से शेड तक पक्का पैदल मार्ग बनाने की मांग भी रखी. कुल मिलाकर, इन सभी परियोजनाओं के जरिए साहिबगंज तेजी से रेलवे के एक महत्वपूर्ण तकनीकी और परिचालन केंद्र के रूप में उभर रहा है.

