24 जिलों का सफर पूरा कर रांची पहुंचेगी भर्ती सुधार यात्रा, छात्रों ने की CBI जांच की मांग
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और पेपर लीक के खिलाफ चल रही भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा 11 सितंबर को रांची में समाप्त होगी 24 जिलों का दौरा कर चुकी यात्रा को लेकर आंदोलनकारियों ने CBI जांच समेत कई मांगें उठाई हैं.

Ranchi : झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर चल रही भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है. आंदोलनकारियों के मुताबिक, 24 जिलों का दौरा करने के बाद यह यात्रा 10 सितंबर को रांची पहुंचेगी और 11 सितंबर को इसका औपचारिक समापन किया जाएगा. मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और कथित गड़बड़ियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है. यात्रा के दौरान छात्रों और अभिभावकों से संवाद कर उनकी समस्याओं और मांगों को समझने का प्रयास किया गया. आंदोलनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए CBI जांच की मांग भी दोहराई है. प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर शोक व्यक्त करने के साथ हुई.
24 जिलों से होकर गुजरी भर्ती सुधार यात्रा
देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा की शुरुआत 24 अगस्त को रामगढ़ के गोला प्रखंड स्थित नेमरा गांव से हुई थी. इसके बाद यात्रा राज्य के अलग-अलग जिलों से गुजरती हुई हजारीबाग, चतरा, संथाल परगना, धनबाद, बोकारो, सिल्ली, कोल्हान, गुमला और खूंटी समेत सभी 24 जिलों तक पहुंची. आंदोलनकारियों ने इस दौरान छात्रों और अभिभावकों के बीच भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को रखा.
11 सितंबर को रांची में होगा समापन
आंदोलनकारियों के अनुसार, यात्रा 10 सितंबर को रांची पहुंचेगी. इसके अगले दिन 11 सितंबर को मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से समापन कार्यक्रम शुरू होगा. यहां से यात्रा कोकर स्थित डिस्टिलरी पुल के पास धरती आबा बिरसा मुंडा के समाधि स्थल तक जाएगी. आंदोलन की आगे की रणनीति 15 सितंबर के बाद देवेंद्र नाथ महतो द्वारा घोषित किए जाने की बात कही गई है.
पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ी का लगाया आरोप
आंदोलन से जुड़े छात्रों का आरोप है कि झारखंड में कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं. उनके मुताबिक, पेपर लीक और कथित सेटिंग-गेटिंग जैसी शिकायतों का सीधा असर मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों पर पड़ता है. छात्रों का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होगी तो योग्य उम्मीदवारों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
वार्ता के बाद भी समाधान नहीं मिलने का दावा
आंदोलनकारियों ने बताया कि सरकार के साथ बातचीत के बावजूद उनकी मांगों का अपेक्षित समाधान नहीं हो सका. उनके अनुसार, मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन न्यायालय से रोक लगने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. इससे छात्रों में असंतोष बना हुआ है.
CBI जांच समेत कई मांगें उठाईं
छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच के लिए CBI जांच कराने की मांग की है. इसके साथ ही PGT, लैब असिस्टेंट, नगर पालिका, उत्पाद सिपाही और CGL टेक्निकल समेत अन्य परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों की जांच की मांग भी रखी गई है. आंदोलनकारियों ने आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज FIR को वापस लेने अथवा उनके मामलों में उचित कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है. अब सभी की नजर 11 सितंबर के समापन कार्यक्रम और इसके बाद घोषित होने वाली आंदोलन की अगली रणनीति पर है.

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