JPSC पेपर लीक मामले में राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी, बोले- छात्रों से खुद मिलकर समाधान करें
JPSC पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन जारी है. इसी बीच राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर आंदोलनकारी छात्रों से खुद मुलाकात करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की सलाह दी है.

Ranchi: झारखंड में जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है. कई छात्र अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इसी बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की सलाह दी है. राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से स्वयं मुलाकात करने और उनकी बची हुई चिंताओं का समाधान करने का आग्रह किया है. उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए सरकार से संवेदनशीलता के साथ जल्द कार्रवाई करने की अपील भी की है.
छात्रों के आंदोलन को लेकर राहुल गांधी ने लिखी चिट्ठी
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र में झारखंड के छात्रों और युवाओं की समस्याओं का जल्द समाधान करने की बात कही है. पत्र को रांची महानगर कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. कुमार राजा ने मुख्यमंत्री तक पहुंचाया और शनिवार को उन्हें सौंपा. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार मानती है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों को पार्टी का पूरा समर्थन है. राहुल गांधी के मुताबिक, छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण है और उनकी मांगें जायज़ हैं. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार ने समिति के माध्यम से छात्रों के साथ बातचीत शुरू की है और कई मांगों पर सहमति बनने की स्थिति भी सामने आई है. हालांकि, आंदोलन जारी रहने और छात्रों के भूख हड़ताल पर बैठने को उन्होंने गंभीर विषय बताया.
आंदोलनकारी छात्रों से खुद मुलाकात करने की सलाह
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुझाव दिया कि वह आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करें. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सीधी बातचीत से छात्रों की बाकी चिंताओं को समझने और उनका समाधान निकालने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता मजबूत होगी. राहुल गांधी ने पत्र में इस बात पर भी जोर दिया कि छात्रों की मांगों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच संवाद से मौजूदा गतिरोध को खत्म करने का रास्ता निकाला जा सकता है. इससे पहले सरकार की ओर से गठित समिति छात्रों के साथ बातचीत कर चुकी है और कुछ मुद्दों पर सहमति बनने की बात कही गई है. इसके बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है. ऐसे में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि आंदोलन कर रहे छात्रों की समस्याओं का समाधान जल्द निकाला जा सके और स्थिति सामान्य हो.
शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल
राहुल गांधी ने अपने पत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस और भाजपा का प्रभाव बढ़ गया है और इसे छात्रों के शोषण एवं दमन के साधन में बदल दिया गया है. राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो युवाओं को बेहतर अवसर और मजबूत भविष्य दे. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था वह मजबूत ज्ञान-व्यवस्था नहीं रही, जो एक दशक पहले हुआ करती थी. हालांकि, झारखंड के मौजूदा आंदोलन का केंद्र राज्य की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं और छात्रों की मांगें हैं. राहुल गांधी ने इन्हीं मुद्दों को लेकर राज्य सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है. कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और सरकार को उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए.
राहुल गांधी बोले- युवा ही देश का भविष्य
राहुल गांधी ने अपने पत्र में युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए सरकार से उनके साथ मजबूती से खड़े होने की अपील की. उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में छात्रों और युवाओं को समर्थन और एकजुटता की जरूरत है. राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि वह आंदोलन कर रहे छात्रों की बात स्वयं सुनें और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उचित कार्रवाई करें. झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं. भूख हड़ताल के कारण मामला और गंभीर हो गया है. ऐसे में राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद सरकार पर आंदोलन को लेकर आगे पहल करने का दबाव बढ़ सकता है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात करते हैं या नहीं और सरकार उनकी लंबित मांगों को लेकर क्या कदम उठाती है.

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