कभी नक्सली और पुलिस के साथ घूमता था, फिर बन गया सिरदर्द... जनअदालत से बचा तो पुलिस ने मार गिराया पप्पू लोहरा को
Ranchi: उग्रवादी संगठन JJMP का सुप्रीमो पप्पू लोहरा लातेहार के इचाबार इलाके में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में मारा गया. 10 लाख का यह ईनामी उग्रवादी बेहद शातिर और खतरनाक था. लोहरा ने पिछले डेढ़ दशक में दर्जनों वारदात को अंजाम दिया है और दर्जनों की हत्या की है. पप्पू लोहरा एक जमाने में माओवादियों का प्ला...


Ranchi:
उग्रवादी संगठन JJMP का सुप्रीमो पप्पू लोहरा लातेहार के इचाबार इलाके में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में मारा गया. 10 लाख का यह ईनामी उग्रवादी बेहद शातिर और खतरनाक था. लोहरा ने पिछले डेढ़ दशक में दर्जनों वारदात को अंजाम दिया है और दर्जनों की हत्या की है. पप्पू लोहरा एक जमाने में माओवादियों का प्लाटून कमांडर था. इसके बाद वह माओवादियों के खिलाफ हो गया और पुलिस के साथ घूमने लगा. साल 2009-10 में पप्पू लोहरा माओवादियों के 42 नंबर प्लाटून का कमांडर था. यह प्लाटून लातेहार के कुजरूम गारू से लोहरदगा के पेशरार इलाके तक सक्रिय था. लोहरा पर माओवादियों के टॉप कमांडरों ने गड़बड़ी का आरोप लगाया था और जनअदालत लगाकर उसे मौत की सजा देना चाहते थे. लेकिन माओवादियों का जनअदालत लगने से पहले पप्पू लोहरा माओवादियों के चंगुल से भाग गया और उग्रवादी संगठन जेजेएमपी में शामिल हो गया.
पप्पू लोहरा को नक्सलियों के प्रमुख ठिकानों और उनके हथियारों के बारे में पूरी जानकारी थी. उसने JJMP उग्रवादियों के साथ मिलकर नक्सलियों के कई ठिकानों और उनके हथियार पर कब्जा कर लिया. लोहरा का इतना खौफ बन गया कि माओवादियों को अपने ट्रेनिंग सेंटर छोड़कर भागना पड़ा था. वह पलामू, गढ़वा और लातेहार के इलाके से पप्पू लोहरा करोड़ों की लेवी वसूलता था. इसी दौरान पप्पू लोहरा नक्सलियों के खिलाफ पुलिस का मोहरा बन गया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नक्सल विरोधी अभियानों में उसे पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ कई बार देखा गया.
दिसंबर 2018 को जंगल की एक फोटो वायरल हुई थी, जिसमें सीआरपीएफ के अधिकारी और जवानों साथ पप्पू लोहरा और उग्रवादी सुशील उरांव भी था. उस वक्त भी पप्पू लोहरा पर तब भी 10 लाख इनाम था. फोटो सामने आने के बाद पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों ने कहा था इस तस्वीर की जांच होगी, लेकिन जांच क्या हुई उसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है.
सुरक्षा बलों के साथ घूमने वाला पप्पू लोहरा धीरे-धीरे पुलिस के लिए सिरदर्द बनता चला गया. करीब सात साल पहले तक पुलिस के अधिकारी और जवान जिस उग्रवादी के साथ जंगल में अभियान पर निकलते थे, बाद में वही पुलिस का मोस्टवांटेड बन गया और आज उसी उग्रवादी के साथ मुठभेड़ करना पड़ रहा था. पुलिस के साथ मुठभेड़ में कई बार पप्पू लोहरा बच गया था, लेकिन शुक्रवार की रात लातेहार के इचाबार इलाके में हुई मुठभेड़ में पप्पू लोहरा अपने साथी प्रभात के साथ मारा गया.

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