झारखंड राज्यसभा चुनाव: नामांकन के आखिरी दिन पर टिकी निगाहें, क्या बढ़ेगा मुकाबले का रोमांच?
“झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून है और राजनीतिक दलों के साथ-साथ राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें भी इस दिन पर टिकी हैं”

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून है और राजनीतिक दलों के साथ-साथ राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें भी इस दिन पर टिकी हैं। नियमों के मुताबिक किसी मान्यता प्राप्त दल के उम्मीदवार को नामांकन के लिए कम से कम 9 विधायकों के प्रस्तावक हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार के लिए 10 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर दूसरी सीट को लेकर खींचतान चुनाव को और रोचक बना रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने केंद्रीय नेतृत्व के करीबी प्रणव झा को प्रत्याशी घोषित किया है। हालांकि झामुमो के कई नेताओं और विधायकों का मानना है कि 34 विधायकों के दम पर पार्टी दोनों सीटों पर दावा कर सकती है। इसी असंतोष को शांत करने के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल को रांची भेजा है।
उधर, एनडीए भी एक सीट पर मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। विधानसभा में एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं, जबकि दोनों सीटों पर जीत के लिए 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर ‘इंडिया’ गठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त माने जाते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कोई तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतरता है। यदि ऐसा होता है तो क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। झारखंड का राजनीतिक इतिहास भी राज्यसभा चुनावों में अप्रत्याशित घटनाओं का गवाह रहा है। ऐसे में 8 जून को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि मुकाबला औपचारिक रहेगा या फिर राज्यसभा चुनाव में कोई नया राजनीतिक खेल देखने को मिलेगा।

