बोकारो की लापता नाबालिग सेजल केस में नई उम्मीद, अब CID करेगी जांच
“बोकारो के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र से साल 2020 में लापता हुई नाबालिग सेजल उर्फ पाखी कुमारी झा के मामले में अब नया मोड़ आया है. करीब साढ़े पांच साल बाद इस केस की जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी गई है.”

बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र से करीब साढ़े पांच साल पहले लापता हुई नाबालिग सेजल उर्फ पाखी कुमारी झा के मामले में अब एक बार फिर उम्मीद जगी है. लंबे समय तक स्थानीय पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के बाद इस संवेदनशील केस को अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दिया गया है. वरीय अधिकारियों के निर्देश पर CID ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है. परिजन लगातार न्याय की मांग करते रहे हैं और बेटी की सुरक्षित बरामदगी की गुहार लगाते रहे हैं. अब CID की एंट्री से उम्मीद जताई जा रही है कि पुराने साक्ष्यों और परिस्थितियों की दोबारा जांच के जरिए इस रहस्यमयी गुमशुदगी का सच सामने आ सकता है.
घटना का पूरा विवरण
यह मामला 16 अक्टूबर 2020 का है, जब सेजल घर से ट्यूशन के लिए निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी. उस समय उसकी उम्र करीब 14 साल थी और वह कक्षा 9 की छात्रा थी. घटना के दिन सुबह करीब 10:45 बजे वह कुरमा गांव स्थित ट्यूशन के लिए निकली थी.
करीब आधे घंटे बाद परिजनों को सूचना मिली कि सड़क किनारे एक साइकिल, चप्पल और किताब-कॉपी बिखरी हुई पड़ी है. कॉपी पर लिखे नाम से यह पुष्टि हुई कि सामान सेजल का ही है. इसके बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला.
पुलिस जांच और चुनौतियां
घटना के दिन ही पिता रामकृष्ण झा के बयान पर पिंडराजोरा थाना में अपहरण की आशंका को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. हालांकि शुरुआती जांच में पुलिस को कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला.
न तो किसी तरह की फिरौती की कॉल आई और न ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो सकी. यही वजह रही कि मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया. परिजन लगातार अधिकारियों से संपर्क कर बेटी की तलाश की मांग करते रहे, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई.
अब CID करेगी नई जांच
लंबे समय तक केस में प्रगति न होने के बाद अब इसकी जिम्मेदारी CID को सौंप दी गई है. CID ने कांड संख्या 04/2026 दर्ज कर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला फिर से खोल दिया है.
अब जांच एजेंसी पुराने साक्ष्यों, घटनास्थल की परिस्थितियों और संभावित एंगल्स की दोबारा जांच करेगी. उम्मीद की जा रही है कि आधुनिक तकनीक और विस्तृत जांच के जरिए इस मामले की गुत्थी सुलझाई जा सकेगी और परिवार को न्याय मिल पाएगा.

