पूर्व CM चंपाई सोरेन की बेटी दुखनी सोरेन के नेतृत्व में अवैध खनन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
पूर्वी सिंहभूम के पटमदा प्रखंड में अवैध पत्थर खनन के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की बेटी दुखनी सोरेन ने किया.

पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड में अवैध पत्थर खनन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा. मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीण जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और खनन कार्य बंद कराने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन का नेतृत्व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन ने किया. ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से जारी खनन गतिविधियों ने पर्यावरण, जलस्रोत, खेती, मकानों और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है. प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, जबकि ग्रामीणों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.
अवैध खनन के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों का प्रदर्शन
पूर्वी सिंहभूम के पटमदा प्रखंड के ओड़िया पंचायत अंतर्गत चिरुडीह और लायाडीह क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण मंगलवार को जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचे. ग्रामीणों ने हाथों में पारंपरिक हथियार लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पत्थर खनन पर रोक लगाने की मांग की. प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की बेटी दुखनी सोरेन ने किया. ग्रामीणों का कहना था कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा खनन स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे गांव का पर्यावरण, खेती और लोगों का जीवन प्रभावित हो. उनका आरोप है कि लंबे समय से चल रहे खनन के कारण क्षेत्र की प्राकृतिक व्यवस्था गंभीर संकट में है.
'नियमों से अधिक क्षेत्र में हो रहा खनन'
ग्रामीणों ने उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि ओड़िया मौजा के प्लॉट संख्या 4546 और 988 में पिछले करीब 20 वर्षों से पत्थर खनन किया जा रहा है. उनका दावा है कि खनन कार्य निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन किए बिना संचालित किया जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार, मां तारा कंपनी को सीमित क्षेत्र में खनन की अनुमति मिली थी, लेकिन वास्तविकता में इससे कहीं अधिक इलाके में खनन किया जा रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जहां 30 मीटर तक खुदाई की अनुमति होती है, वहां कई स्थानों पर सैकड़ों फीट गहरी खुदाई की गई है. इससे भू-जल स्तर, जमीन की स्थिरता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें, स्वास्थ्य पर भी असर
ग्रामीणों का आरोप है कि पत्थर खदानों में लगातार होने वाली ब्लास्टिंग के कारण गांव के कई घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं. विस्फोट के दौरान उड़ने वाली धूल से लोगों को सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि खनन क्षेत्र के आसपास स्कूल, आवासीय इलाके और पारंपरिक पूजा स्थल मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है. उनका कहना है कि गांव के बीच से गुजरने वाली 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन भी खनन गतिविधियों के कारण जोखिम बढ़ा रही है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दूषित पानी और धूल के कारण इंसानों के साथ-साथ पशु भी बीमार हो रहे हैं.
जलस्रोत और जाहेरथान प्रभावित होने का आरोप
दुखनी सोरेन ने कहा कि पूर्वी सिंहभूम पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून लागू है. ऐसे में ग्रामसभा की सहमति के बिना खनन कार्य कराना कानून का उल्लंघन है. उन्होंने आरोप लगाया कि खनन के कारण गांव का जाहेरथान, तालाब और पारंपरिक जलस्रोत प्रभावित हो चुके हैं. ग्रामीणों का दावा है कि तालाब के पानी में तेल जैसी परत और ब्लास्टिंग में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की गंध महसूस की जा रही है. इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता जो लोगों के जीवन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए.
15 दिनों में जांच का आश्वासन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद जिला प्रशासन ने 15 दिनों के भीतर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अधिकारियों ने कहा कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. हालांकि, दुखनी सोरेन ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर जल सत्याग्रह करने के लिए भी तैयार हैं. ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि अवैध खनन की निष्पक्ष जांच कराई जाए, नियमों के विरुद्ध चल रहे खनन कार्य को तत्काल रोका जाए और प्रभावित गांवों के पर्यावरण, जलस्रोत तथा लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts
हेमंत सोरेन गृह विभाग छोड़ें, स्थायी DGP नियुक्त करें; पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने दी आंदोलन की चेतावनी
हेमंत सरकार का बड़ा कदम: टाटा मोटर्स के साथ मिलकर जमशेदपुर में बनेगा ड्राइविंग रिसर्च सेंटर








Leave a comment