पूर्वी सिंहभूम में बढ़ा मलेरिया का प्रकोप, लापरवाही पर 10 डॉक्टर समेत 27 कर्मियों पर कार्रवाई
पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. 14 वर्षीय छात्रा की मौत के साथ जिले में मलेरिया से मरने वालों की संख्या 9 हो गई है. संक्रमण बढ़ने के बीच स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाही बरतने वाले 10 डॉक्टरों समेत 27 स्वास्थ्यकर्मियों को शोकॉज नोटिस जारी किया.

East Singhbhum: पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. गालूडीह क्षेत्र में 14 वर्षीय छात्रा किरण हांसदा की मौत के साथ जिले में मलेरिया से मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है. लगातार बढ़ते संक्रमण ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. जिले में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो गई है. सिविल सर्जन ने 27 स्वास्थ्यकर्मियों को शोकॉज नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
14 वर्षीय छात्रा की मौत से बढ़ी चिंता
गालूडीह थाना क्षेत्र के हेंदलजुड़ी पंचायत अंतर्गत केंदडांगा टोला की रहने वाली 14 वर्षीय छात्रा किरण हांसदा की मलेरिया से मौत हो गई. वह राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय काकड़ीशोल में कक्षा आठवीं की छात्रा थी. परिजनों के अनुसार, वह धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गांव में अपने रिश्तेदारों के यहां रह रही थी. तबीयत बिगड़ने पर पहले उसे केंदडांगा लाया गया, फिर घाटशिला के स्वर्णरेखा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया. हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. अस्पताल की रिपोर्ट में मौत का कारण मलेरिया स्पेक्ट्रम बताया गया है. इस घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है.
जिले में तेजी से बढ़ रहे मलेरिया के मामले
पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार जांच अभियान चला रहा है. मंगलवार को जिले में 11,362 लोगों की जांच की गई, जिनमें 83 लोग मलेरिया संक्रमित पाए गए. 29 जून से 14 जुलाई तक कुल 1,30,380 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिसमें 2,072 मरीज पॉजिटिव मिले हैं. डुमरिया और पोटका में सबसे अधिक 22-22 नए मामले सामने आए हैं. इसके अलावा घाटशिला में 10, मुसाबनी में 9, धालभूमगढ़ में 7, सदर अस्पताल क्षेत्र में 7 और पटमदा में 6 नए संक्रमित मिले हैं. लगातार बढ़ते मामलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने और दवा वितरण तेज करने की मांग की है.
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई, 27 कर्मियों को शोकॉज
मलेरिया और डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने 10 डॉक्टरों समेत कुल 27 स्वास्थ्यकर्मियों को शोकॉज नोटिस जारी किया है. इनमें चार एएनएम, तीन लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट, एक जीएनएम, तीन सहायक कर्मचारी, एक होमगार्ड, दो एमपीडब्ल्यू और दो गार्ड शामिल हैं. सभी को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सेवा समाप्ति की अनुशंसा की जाएगी. इसके साथ ही संबंधित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने का भी आदेश दिया गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
औचक निरीक्षण में कई डॉक्टर और कर्मचारी मिले अनुपस्थित
सिविल सर्जन के निर्देश पर शहर के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों का औचक निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान कई डॉक्टर और कर्मचारी अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित पाए गए, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मलेरिया और डेंगू जैसे संक्रामक रोगों के बढ़ते खतरे के बीच डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित मौजूदगी बेहद जरूरी है. मरीजों को समय पर इलाज मिलना विभाग की प्राथमिकता है. सिविल सर्जन ने चेतावनी दी कि भविष्य में भी यदि किसी कर्मचारी की ड्यूटी में लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश भी दिया है.
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में जांच, दवा वितरण और जागरूकता अभियान तेज करने का दावा किया है. एमजीएम अस्पताल में फिलहाल आठ मलेरिया मरीजों का इलाज चल रहा है. वहीं अनुपस्थित पाए गए दो डॉक्टरों के खिलाफ अलग से प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उनकी प्रतिनियुक्ति सदर अस्पताल में कर दी गई है. सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है. उन्होंने माना कि कुछ स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही भी संक्रमण के तेजी से फैलने का कारण बनी है. विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार या मलेरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और मच्छरों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाएं.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts
रांची RSS कार्यालय बम धमाका मामले में NIA की बड़ी कार्रवाई, लोहरदगा में 5 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी, झारखंड में सिर्फ 3; बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर उठाए सवाल






Leave a comment