JPSC बैकलॉग परीक्षा में बड़ा खुलासा: 15 सही जवाब देने वाला अभ्यर्थी भी हुआ सफल
“JPSC बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के परिणाम पर गंभीर सवाल उठे हैं. दावा है कि एक अभ्यर्थी ने 100 में केवल 32 प्रश्नों के उत्तर दिए, जिनमें सिर्फ 15 सही थे, फिर भी उसे सफल घोषित कर दिया गया. मामले की जांच CID कर रही है, जबकि आयोग ने मुख्य परीक्षा पर फिलहाल रोक लगा दी है.”

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम पर उठे सवाल अभी शांत भी नहीं हुए थे कि अब JPSC बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा-2025 का रिजल्ट भी जांच के दायरे में आ गया है. एक अभ्यर्थी की ओएमआर शीट सामने आने के बाद दावा किया जा रहा है कि उसने 100 में केवल 32 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, जिनमें से मात्र 15 उत्तर सही पाए गए. इसके बावजूद उसे सफल घोषित कर दिया गया. इस मामले के सामने आने के बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा पर रोक लगा दी है और जांच एजेंसियां डिजिटल सर्वर व ओएमआर रिकॉर्ड की गहन जांच में जुट गई हैं.
JPSC बैकलॉग परीक्षा के परिणाम पर उठे सवाल
JPSC बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के परिणाम में कथित अनियमितताओं ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच के दौरान एक परीक्षा केंद्र की ओएमआर शीट सीआईडी के सामने आई, जिसमें संबंधित अभ्यर्थी ने 100 में केवल 32 प्रश्नों के उत्तर दिए थे. प्रारंभिक उत्तर कुंजी के अनुसार इनमें से केवल 15 उत्तर सही और 17 गलत पाए गए. सामान्य परिस्थितियों में इतने कम अंकों के साथ किसी भी अभ्यर्थी का प्रारंभिक परीक्षा में सफल होना लगभग असंभव माना जाता है. इसके बावजूद छह जुलाई को जारी परिणाम में उस अभ्यर्थी का चयन हो गया. इस खुलासे के बाद आयोग ने 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के साथ-साथ बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा की मुख्य परीक्षा भी स्थगित कर दी, जो 1, 2 और 3 अगस्त को आयोजित होनी थी. इससे पहले भी 14वीं पीटी परीक्षा में ओएमआर शीट के आधार पर कथित गड़बड़ियों का मामला सामने आया था.
अभय तिवारी और कथित नेटवर्क पर जांच एजेंसियों की नजर
जांच के दायरे में परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टोडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी का नाम भी सामने आया है. आरोप है कि उन्होंने JPSC प्रारंभिक परीक्षा भी पास की थी और बाद में सीजीएल के माध्यम से सरकारी सेवा में चयनित हुए. उनके भाई अक्षय तिवारी और भाई की पत्नी का भी सीजीएल के जरिए चयन हुआ था. इस बार JPSC पीटी परीक्षा में अभय और अक्षय दोनों सफल घोषित किए गए हैं. जानकारी के अनुसार अभय तिवारी पहले स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक एजेंसी में भी कार्यरत रहे हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या उन्होंने अपने संपर्क में रहने वाले अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल किया. दावा किया जा रहा है कि उनके कई करीबी उम्मीदवार भी इस बार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए हैं, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है.
डिजिटल सर्वर और ओएमआर में हेरफेर की आशंका, कई चयनों की जांच
सीआईडी और अन्य जांच एजेंसियां अब परीक्षा के डिजिटल सर्वर, ओएमआर शीट और डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम की विस्तृत जांच कर रही हैं. आशंका जताई जा रही है कि परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में तकनीकी स्तर पर हेरफेर की गई हो सकती है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अभय तिवारी ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता कैसे हासिल की. उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका चयन वर्ष 2023 में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) पद के लिए हुआ था. इसके अलावा वे PGTTCE-2023 शिक्षक भर्ती की अंतिम चयन सूची में भी शामिल रहे और पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर स्थित एक उच्च विद्यालय में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में चयनित हुए. साथ ही ACF (PT)-2024, FRO (PT)-2024 और FSO लिखित परीक्षा-2023 में भी उनके सफल होने की जानकारी सामने आई है. अब जांच एजेंसियां इन सभी चयन प्रक्रियाओं और परीक्षा रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच कर रही हैं.

