RIMS में बड़ा खुलासा! फर्जी नामांकन और करोड़ों के टेंडर की CID जांच तेज, कई अधिकारियों पर बढ़ी निगाहें
रिम्स में कथित फर्जी एमबीबीएस नामांकन और करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन मामले की CID जांच तेज हो गई है. जांच एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है. दस्तावेजों के सत्यापन के बाद एफआईआर और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की संभावना जताई जा रही है.

झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) से जुड़े कथित फर्जी नामांकन और करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन मामले की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है. मामले की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने प्रारंभिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने रिम्स प्रशासन से बड़ी संख्या में रिकॉर्ड और आधिकारिक फाइलें अपने कब्जे में ली हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय निर्णयों पर सवाल उठने लगे हैं. फिलहाल एजेंसी दो प्रमुख मामलों पर विशेष रूप से फोकस कर रही है—पहला, कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले का मामला और दूसरा, सफाई व्यवस्था से जुड़े टेंडर में नियमों में कथित बदलाव कर कुछ एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के आरोप. जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं.
CID के हाथ लगे अहम दस्तावेज
सूत्रों के मुताबिक जांच टीम ने रिम्स से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फाइलें, टेंडर रिकॉर्ड और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज जुटाए हैं. इन रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं नियमों का उल्लंघन या दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई. दस्तावेजों के सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
फर्जी नामांकन की जांच पर विशेष फोकस
जांच एजेंसी वर्ष 2025 के एमबीबीएस प्रवेश से जुड़े उन मामलों की पड़ताल कर रही है, जिनमें कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर दाखिला लेने की आशंका जताई गई है. यह भी देखा जा रहा है कि यदि अनियमितता हुई है तो वह किसी एक व्यक्ति तक सीमित थी या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था.
टेंडर प्रक्रिया में नियमों पर उठे सवाल
सीआईडी सफाई व्यवस्था से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडर की प्रक्रिया की भी जांच कर रही है. आरोप है कि निविदा की कुछ शर्तों में बदलाव कर विशेष एजेंसियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई. जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि निर्णय किस स्तर पर लिया गया और संबंधित प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या नहीं.
निदेशक के इस्तीफे से बढ़ी चर्चाएं
रिम्स निदेशक के हालिया इस्तीफे ने पूरे मामले को लेकर कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है. हालांकि इस्तीफे के पीछे की वजह पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जांच एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों और घटनाक्रम के आधार पर सभी पहलुओं का विश्लेषण कर रही है.
आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
जांच पूरी होने के बाद यदि दस्तावेजों में अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो सीआईडी नियमित एफआईआर दर्ज कर संबंधित अधिकारियों और अन्य जुड़े लोगों से पूछताछ कर सकती है. फिलहाल एजेंसी साक्ष्यों के सत्यापन में जुटी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे. ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है.

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