झारखंड के मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत! रिम्स में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा विकसित करने पर जोर
झारखंड में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण की सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी तेज हो गई है. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में चार अस्पतालों के पंजीकरण प्रस्तावों की समीक्षा की गई. पारस एचईसी और मेदांता के किडनी ट्रांसप्लांट संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति मिली.

Ranchi: झारखंड में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण की सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सलाहकार समिति की बैठक में अस्पतालों के पंजीकरण, रिम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित करने और मस्तिष्क-मृत मरीजों के अंगदान की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने पर चर्चा हुई. बैठक में पारस एचईसी और मेदांता अस्पताल के गुर्दा प्रत्यारोपण संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई. सरकार का लक्ष्य राज्य में ही मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करना है.
चार अस्पतालों के पंजीकरण और नवीकरण प्रस्तावों पर चर्चा
अंग प्रत्यारोपण सलाहकार समिति की बैठक में नेत्र की पुतली और गुर्दा प्रत्यारोपण से संबंधित अस्पतालों के पंजीकरण तथा नवीकरण के प्रस्तावों की समीक्षा की गई. इस दौरान जमशेदपुर आई हॉस्पिटल, मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल, पारस एचईसी हॉस्पिटल, धुर्वा और ऑर्किड मेडिकल सेंटर, रांची से जुड़े प्रस्तावों पर विचार हुआ. बैठक में पारस एचईसी और मेदांता के गुर्दा प्रत्यारोपण संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई. अन्य प्रस्तावों पर निर्धारित मानकों और आवश्यक प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस पहल का उद्देश्य राज्य में प्रत्यारोपण सेवाओं का विस्तार करना और जरूरतमंद मरीजों के लिए उपचार के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है.
मस्तिष्क-मृत मरीजों के अंगदान के लिए दिशा-निर्देश मंजूर
झारखंड सरकार ने मृत अंगदाताओं से अंग एवं ऊतक प्राप्त करने तथा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने की स्वीकृति दी है. इनमें मस्तिष्क मृत्यु की अनिवार्य घोषणा, गैर-प्रत्यारोपण केंद्रों से अंग प्राप्त करने की प्रक्रिया, चिकित्सकीय-कानूनी मामलों में शव परीक्षण और अंगों के परिवहन के लिए हरित गलियारा बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं. इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य अंगदान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है. संबंधित संकल्प में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 और उसके संशोधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है. संकल्प के अनुसार, इन दिशा-निर्देशों को मंत्रिपरिषद की 2 सितंबर 2025 की बैठक में स्वीकृति मिली थी.
रिम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण सुविधा विकसित करने पर जोर
बैठक में रिम्स, रांची में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधारभूत संरचना और जरूरी सुविधाओं की जानकारी ली. उन्होंने निर्देश दिया कि अनुभवी शल्य चिकित्सकों को जोड़ने के साथ राज्य के तीन से चार योग्य डॉक्टरों का चयन कर विशेष दल गठित करने की दिशा में कार्रवाई की जाए. जरूरत पड़ने पर बाहर से एक-दो विशेषज्ञ चिकित्सकों को आमंत्रित करने पर भी विचार किया जाएगा. इससे स्थानीय डॉक्टरों को प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव मिल सकेगा. बैठक में वेल्लोर स्थित सीएमसी के विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करने की संभावना पर भी चर्चा हुई, ताकि रिम्स की प्रत्यारोपण संबंधी क्षमता मजबूत हो सके.
अंगदान व्यवस्था मजबूत करने और मरीजों को राहत देने की तैयारी
बैठक में मस्तिष्क-मृत मरीजों के अंगदान, अस्पतालों के बीच समन्वय और अंगों के सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन की व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई. सरकार का प्रयास है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से अंगदान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बने और जरूरतमंद मरीजों तक उपलब्ध अंग समय पर पहुंच सकें. रिम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित होने से राज्य के मरीजों को अपने ही राज्य में उपचार का विकल्प मिल सकता है और दूसरे राज्यों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी. बैठक में निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, रिम्स के संबंधित विभागाध्यक्ष, अस्पताल निदेशक डॉ. संजय कुमार, झारखंड उच्च न्यायालय की अधिवक्ता निरुपमा क्यूरेस्टा, उप सचिव ध्रुव प्रसाद और राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे.

