झारखंड की धरती से निकला जंपबॉल अब अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर : टिप चटर्जी
देवघर की उप महापौर टिप चटर्जी ने ईस्ट जोन मेंस-विमेंस जंपबॉल चैंपियनशिप की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड की धरती से निकला जंपबॉल अब अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने खिलाड़ियों को बेहतर मंच, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन देने पर जोर दिया.

Deoghar: देवघर नगर निगम की उप महापौर टिप चटर्जी ने कहा कि झारखंड की धरती से जंपबॉल जैसे नए खेल की शुरुआत होना और उसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास प्रदेश के लिए गर्व की बात है. जंपबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (जेएफआई) के तत्वावधान में आयोजित ईस्ट जोन मेंस एवं विमेंस जंपबॉल चैंपियनशिप के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं. उन्होंने प्रतियोगिता के आयोजन और खेल को बढ़ावा देने की पहल की सराहना की. टिप चटर्जी ने कहा कि किसी नए खेल को स्थापित करने और लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयास, समर्पण और दूरदर्शी सोच की जरूरत होती है.
खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच देने की पहल सराहनीय : टिप चटर्जी
टिप चटर्जी ने फेडरेशन से जुड़े प्रवेश जी और राजेश रंजन को बधाई देते हुए कहा कि जंपबॉल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिश सराहनीय है. उन्होंने कहा कि झारखंड में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, उचित मंच और प्रोत्साहन देने की. इस तरह की प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों से सीखने का अवसर देती हैं. विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों के लिए ऐसे आयोजन आगे बढ़ने का बेहतर माध्यम बन सकते हैं. खेल युवाओं को नई पहचान और बेहतर भविष्य देने का सशक्त जरिया है.
खेल भावना और अनुशासन के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें खिलाड़ी
उप महापौर ने चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाले सभी पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए खेल भावना, अनुशासन और मेहनत के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की अपील की. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रतियोगिता से उभरने वाली प्रतिभाएं भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का नाम रोशन करेंगी. उन्होंने खेल संगठनों और समाज के सभी वर्गों से उभरते खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की अपील की. टिप चटर्जी ने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और अवसर मिलने से ही खेल जगत में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं. खेलों को बढ़ावा देना और झारखंड को नई पहचान दिलाना ऐसे आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए.

