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Home»झारखंड»6 CM के साथ मंत्री रहीं जोबा मांझी, फिर भी जमीन पर बैठ सखुआ पत्तल में खाया दाल-भात
झारखंड

6 CM के साथ मंत्री रहीं जोबा मांझी, फिर भी जमीन पर बैठ सखुआ पत्तल में खाया दाल-भात

“झारखंड की राजनीति में सादगी और जमीन से जुड़ाव की मिसाल मानी जाने वाली सिंहभूम सांसद जोबा मांझी एक बार फिर चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वह अपने विधायक बेटे जगत मांझी के साथ जमीन पर बैठकर सखुआ के पत्तल में दाल-भात और सब्जी खाते हुए नजर आ रही हैं.”

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Satya MishraEditorial Desk
Published May 27, 2026 · 8:45 AM· 6 min read
6 CM के साथ मंत्री रहीं जोबा मांझी, फिर भी जमीन पर बैठ सखुआ पत्तल में खाया दाल-भात

Chaibasa: झारखंड की राजनीति में सादगी और जमीन से जुड़ाव की मिसाल मानी जाने वाली सिंहभूम सांसद जोबा मांझी एक बार फिर चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वह अपने विधायक बेटे जगत मांझी के साथ जमीन पर बैठकर सखुआ के पत्तल में दाल-भात और सब्जी खाते हुए नजर आ रही हैं. खास बात यह है कि जोबा मांझी झारखंड की उन वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं, जो छह अलग-अलग मुख्यमंत्रियों की सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और वर्तमान में सांसद हैं. इसके बावजूद उनके जीवन में न तो वीआईपी तामझाम दिखता है और न ही राजनीतिक दिखावा. ग्रामीणों के बीच सहज अंदाज में बैठकर भोजन करने की उनकी तस्वीरें लोगों को काफी प्रभावित कर रही हैं. राजनीति में लंबे अनुभव और बड़े पदों पर रहने के बावजूद उनका यह सरल स्वभाव अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

जंगल-पहाड़ के बीच ग्रामीणों संग जमीन पर बैठकर किया भोजन

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सिंहभूम सांसद जोबा मांझी अपने विधायक पुत्र जगत मांझी के साथ मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र के गुदड़ी प्रखंड स्थित लिगिर गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आयोजकों ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन करने की व्यवस्था की थी. इलाके की पारंपरिक संस्कृति के अनुसार सखुआ के पत्तल में दाल-भात और सब्जी परोसी गई. सांसद और विधायक बिना किसी झिझक के ग्रामीणों के साथ पंगत में बैठ गए और सामान्य लोगों की तरह भोजन किया.

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इस दौरान वहां मौजूद कई ग्रामीण सांसद और विधायक को जमीन पर बैठा देख असहज महसूस करने लगे. लोगों को लगा कि इतने बड़े नेता के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए थी. लेकिन जोबा मांझी ने खुद लोगों को सहज किया और कहा कि वह आंदोलनकारी परिवार से आती हैं और राजनीति में कितना भी बड़ा पद मिल जाए, जमीन से जुड़ाव कभी खत्म नहीं होना चाहिए. उनका यह व्यवहार वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भी साफ देखा जा सकता है कि जोबा मांझी पूरी सहजता और आत्मीयता के साथ लोगों से बातचीत करते हुए भोजन कर रही हैं.

संघर्ष और सादगी से भरा रहा जोबा मांझी का जीवन

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जोबा मांझी का जीवन संघर्ष, सादगी और जनसरोकारों से जुड़ा रहा है. उनके पति देवेंद्र मांझी सारंडा-पोड़ाहाट क्षेत्र में जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए आंदोलन करते हुए शहीद हो गए थे. उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी. बताया जाता है कि जब उनके पति विधायक थे, तब भी जोबा मांझी चक्रधरपुर के इतवारी बाजार में सब्जी बेचकर परिवार चलाने में सहयोग करती थीं.

पति के निधन के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई. बावजूद इसके उन्होंने कभी अपनी जड़ों से दूरी नहीं बनाई. आज भी वह चक्रधरपुर स्थित अपने घर में बेहद सामान्य जीवन जीती हैं. खेतों में खेती करना, धान की रोपाई में हिस्सा लेना और ग्रामीण महिलाओं के साथ काम करना उनके जीवन का हिस्सा है. राजनीति में ऊंचे पदों तक पहुंचने के बावजूद उनका यह सरल जीवन लोगों के लिए प्रेरणा माना जाता है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जोबा मांझी की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह उनकी सादगी और आम लोगों से जुड़ाव है.

पांच बार विधायक और छह मुख्यमंत्रियों के साथ मंत्री रहीं

जोबा मांझी का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है. उन्होंने मनोहरपुर विधानसभा सीट से 1995 से लेकर 2024 तक लगातार पांच बार जीत दर्ज की. इस दौरान वह झारखंड की राजनीति का अहम चेहरा बन गईं. उन्होंने राज्य के छह अलग-अलग मुख्यमंत्रियों के साथ मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली. पिछली हेमंत सोरेन सरकार में वह महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मंत्री थीं.

2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने सिंहभूम सीट से जीत हासिल कर संसद तक का सफर तय किया. हालांकि राजनीतिक ऊंचाइयों तक पहुंचने के बाद भी उनके जीवन में दिखावे की कोई जगह नहीं है. आज के समय में जहां अधिकांश नेता अपनी हर गतिविधि को सोशल मीडिया पर प्रचारित करते हैं, वहीं जोबा मांझी इससे दूरी बनाए रखती हैं. वायरल वीडियो को लेकर भी कहा जा रहा है कि उन्हें शायद यह तक पता नहीं था कि कोई उनका वीडियो बना रहा है. यही वजह है कि लोग उनकी सादगी को राजनीतिक स्टंट नहीं बल्कि वास्तविक जीवन शैली मान रहे हैं. उनका यह व्यवहार राजनीति में सादगी और जनसंपर्क की एक अलग मिसाल पेश करता है.

आज भी खेतों में उतरकर करती हैं खेती-किसानी

राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने और सांसद बनने के बावजूद जोबा मांझी आज भी खेती-किसानी से जुड़ी हुई हैं. मानसून के दिनों में वह खुद खेतों में धान रोपती नजर आती हैं, जबकि ठंड के मौसम में मजदूरों के साथ मिलकर फसल काटने और खलिहान में काम करने में भी हिस्सा लेती हैं. ग्रामीण महिलाएं उन्हें अपने बीच एक सामान्य महिला की तरह ही देखती हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जोबा मांझी कभी भी खुद को जनता से अलग नहीं मानतीं. चाहे गांव का कोई सामाजिक कार्यक्रम हो या पारंपरिक आयोजन, वह हमेशा आम लोगों के बीच सहज तरीके से शामिल होती हैं. यही कारण है कि सिंहभूम और कोल्हान क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह साबित किया है कि राजनीति में बड़े पद हासिल करने के बाद भी सादगी और जमीन से जुड़ाव बनाए रखा जा सकता है. जोबा मांझी का जीवन उन नेताओं के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है, जो राजनीति को केवल सत्ता और प्रचार का माध्यम मानते हैं.

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