BJP के चुनाव मैदान में उतरते ही JMM-कांग्रेस अलर्ट, बढ़ी हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका
झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है. BJP की एंट्री से JMM-कांग्रेस गठबंधन अलर्ट मोड में आ गया है. 81 सदस्यीय विधानसभा में 28 वोटों के गणित के बीच 4 विधायकों का रुख चुनाव का परिणाम बदल सकता है. हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका के चलते सभी दल रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं.

झारखंड :- राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. दो रिक्त सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी रणनीतियों पर काम तेज कर दिया है. इस बार मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प माना जा रहा है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है. भाजपा के इस कदम ने सत्तारूढ़ गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है और राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. विधानसभा में संख्या बल के आधार पर झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दलों के गठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई देती है, लेकिन राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीति की संभावनाओं को देखते हुए सभी दल सतर्क नजर आ रहे हैं. आगामी दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया के साथ चुनावी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.
राज्यसभा चुनाव के लिए क्या है जीत का गणित?
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं. राज्यसभा चुनाव में किसी उम्मीदवार को जीत दर्ज करने के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोटों की आवश्यकता होती है. मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा-माले के संयुक्त गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. यह संख्या दोनों सीटों पर जीत के लिए पर्याप्त मानी जा रही है.
दूसरी ओर, भाजपा और उसके सहयोगी दलों की संयुक्त संख्या 24 के आसपास पहुंचती है. ऐसे में आंकड़ों के आधार पर एनडीए गठबंधन पीछे दिखाई देता है, लेकिन चुनावी रणनीति के स्तर पर भाजपा मुकाबले को दिलचस्प बनाने की तैयारी में है.
भाजपा की एंट्री से बढ़ी राजनीतिक हलचल
संख्या बल कम होने के बावजूद भाजपा द्वारा उम्मीदवार उतारने की घोषणा ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा चुनाव को केवल औपचारिक मुकाबला नहीं मान रही, बल्कि वह अपने पक्ष में अतिरिक्त समर्थन जुटाने की संभावनाओं पर भी काम कर सकती है.
यही वजह है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता भी पूरी सतर्कता बरत रहे हैं. भाजपा की सक्रियता ने चुनावी रणनीति को नया मोड़ दे दिया है और अब सभी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं.
संभावित क्रॉस वोटिंग और गठबंधन की चिंता
राज्यसभा चुनाव में गुप्त मतदान की व्यवस्था नहीं होती, फिर भी राजनीतिक दलों के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती माना जाता है. इसी कारण सत्ताधारी गठबंधन के भीतर संभावित क्रॉस वोटिंग या अन्य राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा हो रही है.
गठबंधन से जुड़े नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर नजर रखने की मांग भी उठाई है. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यदि कुछ विधायक अलग रुख अपनाते हैं तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. हालांकि वर्तमान आंकड़े अब भी सत्ता पक्ष के पक्ष में दिखाई देते हैं.
उम्मीदवारों के चयन पर टिकी अगली नजर
राज्यसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत जारी है. माना जा रहा है कि एक सीट पर झामुमो और दूसरी सीट पर कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतार सकती है. वहीं भाजपा भी अपने प्रत्याशी की घोषणा की तैयारी में है.
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी मुकाबले की तस्वीर और साफ होगी. यदि दोनों सीटों पर आवश्यक संख्या से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो मतदान की नौबत आ सकती है. ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव सबसे चर्चित विषय बना रहेगा.

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