झारखंड में बालू पर बड़ा फैसला! 7 साल बाद खुलेंगे घाट, सस्ती हो सकती है कीमतें
“झारखंड में लंबे समय से जारी बालू संकट को कम करने की दिशा में सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. अब जिलों के उपायुक्त (DC) को बालू घाटों की खनन लीज स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है. ”

Ranchi: झारखंड में लंबे समय से जारी बालू संकट को कम करने की दिशा में सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. अब जिलों के उपायुक्त (DC) को बालू घाटों की खनन लीज स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है. माना जा रहा है कि इससे वर्षों से अटकी लीज प्रक्रिया में तेजी आएगी और बंद पड़े कई बालू घाट फिर चालू हो सकेंगे. सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर भी असर पड़ेगा. हालांकि दूसरी तरफ एक बड़ी चुनौती भी सामने है, क्योंकि हर साल जून से अक्टूबर तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (NGT) की रोक लागू हो जाती है. ऐसे में नई व्यवस्था का वास्तविक असर कितना होगा, इस पर नजर बनी हुई है.
सात साल बाद लीज प्रक्रिया में तेजी, कई जिलों में समझौते की तैयारी
आधिकारिक जानकारी के अनुसार हाल के दिनों में कुछ जिलों में बालू घाटों के लिए लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर शुरू हुए हैं. रांची में भी लंबे अंतराल के बाद इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी है. सूत्रों का कहना है कि दुमका, जामताड़ा, जमशेदपुर समेत अन्य जिलों में भी जल्द लीज समझौते पूरे हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि राज्य के कई बालू घाट ऐसे हैं, जिनके लिए पर्यावरणीय मंजूरी और जरूरी औपचारिकताएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं. यदि समय पर प्रक्रिया पूरी होती है, तो कुछ जिलों में बालू उठाव दोबारा शुरू होने की संभावना बढ़ सकती है.
NGT की रोक से सीमित समय
हालांकि सरकार की नई पहल के बावजूद एक बड़ी समस्या बरकरार है. हर साल 10 जून से 15 अक्टूबर तक NGT द्वारा बालू उठाव पर प्रतिबंध रहता है. यह रोक पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू होती है. ऐसे में जिन घाटों की लीज प्रक्रिया अभी पूरी होगी, उन्हें बालू उत्खनन के लिए बहुत सीमित समय मिल सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस अवधि में पर्याप्त उठाव नहीं हुआ, तो मानसून के दौरान फिर से बालू की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
अवैध खनन रोकने के लिए सख्त दंड व्यवस्था पर जोर
खनन विभाग को उम्मीद है कि लीज प्रक्रिया नियमित होने से अवैध बालू कारोबार पर अंकुश लगेगा. हाल के वर्षों में टेंडर और निगरानी की कमी के कारण कई जगह अनियमित उत्खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं. नई व्यवस्था में अवैध खनन या परिवहन पर जुर्माना और कार्रवाई को पहले से अधिक सख्त किए जाने की बात कही जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ बालू घाटों के संरक्षण और पर्यावरणीय नुकसान को भी नियंत्रित किया जा सकेगा.

