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Home»राजनीति»झारखंड BJP में ‘Internal Turf War’ की आहट!, नई टीम से पहले दिग्गजों में खलबली
राजनीति

झारखंड BJP में ‘Internal Turf War’ की आहट!, नई टीम से पहले दिग्गजों में खलबली

“झारखंड भाजपा में नई टीम के गठन से पहले ‘Internal Turf War’ के संकेत तेज हो गए हैं. आदित्य साहू के सामने दिग्गज नेताओं को साधने और नए चेहरों को मौका देने की बड़ी चुनौती है, जिससे संगठन के भीतर संतुलन बनाना आसान नहीं होगा.”

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Satya MishraEditorial Desk
Published Mar 23, 2026 · 11:18 AM· 5 min read
झारखंड BJP में ‘Internal Turf War’ की आहट!, नई टीम से पहले दिग्गजों में खलबली

झारखंड बीजेपी में नई प्रदेश कमेटी के गठन से पहले संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है. केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू बंगाल चुनाव के बाद नई टीम की घोषणा करेंगे, लेकिन उससे पहले ही पार्टी के अंदर ‘Internal Turf War’ के संकेत दिखाई देने लगे हैं. एक ओर अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं को संगठन में समायोजित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर नए और युवा चेहरों को मौका देने का दबाव भी बढ़ रहा है. स्थिति इसलिए और जटिल हो गई है क्योंकि कई वरिष्ठ नेता लंबे समय से किसी महत्वपूर्ण पद की प्रतीक्षा में हैं, जबकि संगठन में पहले से जमे चेहरों को हटाने की रणनीति भी बन रही है. ऐसे में यह सिर्फ संगठन विस्तार नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन का बड़ा राजनीतिक अभ्यास बन गया है, जिस पर आने वाले समय में पार्टी की दिशा निर्भर करेगी.

सिंहभूम बना सबसे बड़ी चुनौती

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झारखंड बीजेपी के लिए सिंहभूम प्रमंडल इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. यहां रघुवर दास, अर्जुन मुंडा, चंपई सोरेन, मधु कोड़ा जैसे कई बड़े और प्रभावशाली नेता मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी का चुनावी प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहा है. 2019 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था और 2025 में भी स्थिति में खास सुधार नहीं दिखा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब क्षेत्र में इतने बड़े नेता मौजूद हैं, तो संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर क्यों है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसकी सबसे बड़ी वजह गुटबाजी और नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी है. एक ही क्षेत्र में कई प्रभावशाली नेताओं की मौजूदगी के कारण संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित होती है. अब आदित्य साहू के सामने चुनौती यह है कि इन सभी नेताओं को किस तरह जिम्मेदारी दी जाए, ताकि न केवल संतुलन बना रहे बल्कि पार्टी का प्रदर्शन भी सुधरे.

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नई टीम में इन चेहरों की चर्चा

नई प्रदेश टीम में कई पूर्व विधायक और सांसदों को शामिल किए जाने की चर्चा है. इनमें भानु प्रताप शाही, अनंत ओझा, बिरंची नारायण, रणधीर सिंह, सुनील सिंह, रवींद्र राय, रवींद्र पांडेय और युवा नेता अमित मंडल जैसे नाम प्रमुख हैं. इन नेताओं को शामिल करने से पार्टी को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है. क्षेत्रीय और जातीय संतुलन मजबूत होगा, साथ ही संगठन को अनुभव और नई ऊर्जा का मिश्रण मिलेगा. लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां भी कम नहीं हैं. पार्टी में पहले से ही पदों की संख्या सीमित है, जबकि दावेदारों की सूची लंबी होती जा रही है. ऐसे में नए और पुराने नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है. इसके अलावा, लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष भी उभर सकता है, अगर उन्हें नजरअंदाज किया गया.

सीनियर नेताओं की भूमिका पर सस्पेंस, क्या बदलेंगे समीकरण?

यह भी पढ़ें:तीनपहाड़ स्टेशन पर यात्रियों को बताया गया RailOne App का आसान तरीका

नई टीम के गठन में सबसे बड़ी नजर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर टिकी हुई है. रघुवर दास और अर्जुन मुंडा जैसे नेता, जो कभी संगठन के शीर्ष पर रहे हैं, फिलहाल किसी सक्रिय संगठनात्मक पद पर नहीं हैं. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उन्हें नई टीम में किस भूमिका में शामिल किया जाता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नेताओं को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि इनके पास मजबूत समर्थक वर्ग और संगठनात्मक अनुभव है. हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि नई नेतृत्व टीम को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिले. ऐसे में संतुलन बनाना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी.

पुराने चेहरों की छुट्टी, नए समीकरण पर फोकस!

सूत्रों के अनुसार, आदित्य साहू इस बार संगठन में बड़े बदलाव के मूड में हैं. खासकर उन नेताओं को हटाने की तैयारी है जो पिछले कई वर्षों से एक ही पद पर बने हुए हैं. साहू का फोकस एक ऐसी टीम बनाने पर है, जिसमें उनकी पकड़ मजबूत हो और संगठनात्मक कामकाज तेज किया जा सके. इसके लिए जिला स्तर के सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रदेश स्तर पर लाने की योजना भी बनाई जा रही है. इसके साथ ही जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए टीम का गठन किया जाएगा, ताकि आगामी चुनावों में पार्टी को इसका सीधा लाभ मिल सके.

संगठन विस्तार या ‘Internal Turf War’ की शुरुआत?

झारखंड बीजेपी की नई टीम का गठन इस बार सामान्य प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े राजनीतिक संतुलन का मामला बन चुका है. एक ओर अनुभवी नेताओं को संतुष्ट करना है, तो दूसरी ओर नए चेहरों को अवसर देना है. अगर संतुलन सही बैठा तो संगठन मजबूत होगा, लेकिन अगर किसी वर्ग की नाराजगी बढ़ी तो ‘Internal Turf War’ खुलकर सामने आ सकती है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि आदित्य साहू किस तरह टीम बनाते हैं और कौन से चेहरे इसमें शामिल होते हैं, क्योंकि यही झारखंड बीजेपी की आगामी राजनीति की दिशा तय करेगा.

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