झारखंड: 8 लाख राशन कार्ड होंगे रद्द, फर्जी कार्डधारियों से वसूला जाएगा राशन का पैसा
झारखंड सरकार ने 8 लाख से अधिक संदिग्ध राशन कार्डधारियों की जांच शुरू की है। अपात्र पाए जाने पर कार्ड रद्द होंगे, राशन की वसूली और कानूनी कार्रवाई भी होगी।

झारखंड सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राज्यभर में राशन कार्ड सत्यापन अभियान तेज कर दिया है. इस अभियान के तहत ऐसे लाखों राशन कार्डधारियों की पहचान की गई है जो या तो योजना के लिए अपात्र हैं, लंबे समय से राशन नहीं ले रहे हैं या फिर गलत तरीके से सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार राज्य में 8 लाख से अधिक राशन कार्डधारी जांच के दायरे में हैं. सरकार का उद्देश्य फर्जी, निष्क्रिय और डुप्लीकेट राशन कार्डों को हटाकर वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. जांच में अपात्र पाए जाने वाले लोगों के राशन कार्ड रद्द किए जाएंगे. इतना ही नहीं, उनसे बाजार दर पर राशन की वसूली, ब्याज और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. इस कदम से लाखों लंबित आवेदनों को मंजूरी देने का रास्ता भी साफ होने की उम्मीद है.
क्यों चलाया जा रहा है विशेष सत्यापन अभियान?
राज्य सरकार का मानना है कि राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर लाभुकों का सत्यापन आवश्यक है. हाल के वर्षों में यह सामने आया है कि कई लोग पात्रता नहीं होने के बावजूद राशन कार्ड बनवाकर सरकारी अनाज का लाभ ले रहे हैं. वहीं हजारों ऐसे कार्ड भी हैं जिनका महीनों या वर्षों से उपयोग नहीं हुआ है. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्यभर में विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया गया है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार 8,02,685 राशन कार्डधारियों की पहचान की गई है जिनका रिकॉर्ड संदिग्ध या निष्क्रिय पाया गया है. इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने छह महीने से लेकर एक साल या उससे अधिक समय तक राशन का उठाव नहीं किया. सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से सिस्टम में मौजूद अनियमितताओं को दूर किया जाएगा और केवल पात्र लाभुकों को ही योजना का लाभ मिलेगा.
अपात्र लाभुकों पर होगी सख्त कार्रवाई
सत्यापन के दौरान यदि कोई व्यक्ति अपात्र पाया जाता है और उसने गलत तरीके से राशन कार्ड बनवाकर सरकारी योजना का लाभ लिया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. विभाग की ओर से पहले ऐसे लोगों को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा. यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो राशन कार्ड रद्द कर दिया जाएगा. इसके अलावा संबंधित व्यक्ति से अब तक लिए गए राशन की वसूली बाजार मूल्य के आधार पर की जाएगी. इस राशि पर ब्याज भी लगाया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी. सरकार का यह कदम उन लोगों के लिए चेतावनी माना जा रहा है जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद गरीबों के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं.
जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
राशन कार्ड सत्यापन अभियान के दौरान कई हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं. प्रारंभिक जांच में 12,284 ऐसे एकल राशन कार्ड पाए गए हैं जिनमें कार्डधारी की उम्र 100 वर्ष से अधिक या फिर 18 वर्ष से कम दर्ज है. इसके अलावा 21,750 डुप्लीकेट राशन कार्डों की भी पहचान की गई है, जिनका भौतिक सत्यापन अभी बाकी है. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में डुप्लीकेट कार्डधारियों की संख्या सबसे अधिक है. इन मामलों ने राशन वितरण प्रणाली में मौजूद खामियों को उजागर किया है. अधिकारियों का मानना है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं. सरकार अब तकनीकी माध्यमों और आधार आधारित सत्यापन के जरिए इन अनियमितताओं को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है.
नए नियमों के तहत ई-केवाईसी हुआ अनिवार्य
सरकार ने राशन कार्ड से जुड़े कार्यों को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं. अब राशन कार्ड में किसी नए सदस्य का नाम जोड़ने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है. बिना सत्यापन के किसी भी व्यक्ति का नाम कार्ड में शामिल नहीं किया जाएगा. इस कदम का उद्देश्य फर्जी नाम जोड़ने और डुप्लीकेट लाभुकों की संख्या को कम करना है. विभाग का कहना है कि डिजिटल सत्यापन से पात्रता की जांच अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी. साथ ही लाभुकों को अपने दस्तावेज समय-समय पर अपडेट कराने की भी सलाह दी गई है. अधिकारियों का मानना है कि ई-केवाईसी की अनिवार्यता से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंच सकेगा.
5.50 लाख लंबित आवेदनों को मिलेगा फायदा
फर्जी और निष्क्रिय राशन कार्डों को हटाने के बाद राज्य के लाखों पात्र परिवारों को राहत मिलने की संभावना है. वर्तमान में नए राशन कार्ड और पुराने कार्डों में नाम जोड़ने से संबंधित 5.50 लाख से अधिक आवेदन लंबित पड़े हुए हैं. इनमें करीब 1.94 लाख नए राशन कार्ड के आवेदन और 3.60 लाख से अधिक नाम जोड़ने के आवेदन शामिल हैं. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राज्य में अभी भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं. सरकार का मानना है कि अपात्र लाभुकों को हटाने के बाद इन रिक्त स्थानों पर वास्तविक जरूरतमंद लोगों को शामिल किया जा सकेगा. इससे गरीब और पात्र परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा का लाभ मिलेगा. विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे समय पर सत्यापन प्रक्रिया पूरी करें और किसी भी तरह की गलत जानकारी देने से बचें.

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