जामताड़ा में पुलिस टीम का विरोध: साइबर अपराधी की गिरफ्तारी में बाधा, 60 से ज्यादा ग्रामीणों पर FIR
“जामताड़ा के नारायणपुर थाना क्षेत्र में साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस टीम का विरोध किया. घटना के बाद 50-60 लोगों पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.”

Jamtara: झारखंड के जामताड़ा जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है. नारायणपुर थाना क्षेत्र के तारासठिया गांव में शुक्रवार शाम साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस टीम को ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को बिना गिरफ्तारी के ही लौटना पड़ा. इस घटना के बाद पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में 50 से 60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार, टीम एक संदिग्ध साइबर अपराधी को पकड़ने गई थी, लेकिन गांव के लोगों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
गिरफ्तारी के दौरान हुआ विरोध
जानकारी के अनुसार, साइबर थाना की टीम सब-इंस्पेक्टर हीरालाल महतो के नेतृत्व में तारासठिया गांव पहुंची थी. पुलिस एक संदिग्ध साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने की तैयारी में थी, तभी अचानक बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. देखते ही देखते माहौल गरमा गया और पुलिस तथा ग्रामीणों के बीच तीखी बहस होने लगी. स्थिति बिगड़ने पर अफरा-तफरी मच गई, जिससे पुलिस टीम को पीछे हटना पड़ा. हालात बेकाबू होते देख पुलिस टीम ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन विरोध बढ़ता गया. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस को बिना किसी गिरफ्तारी के ही मौके से वापस लौटना पड़ा.
50-60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
घटना के बाद एसआई हीरालाल महतो ने नारायणपुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने एक नामजद आरोपी मुस्ताक अंसारी समेत 50 से 60 अज्ञात महिला-पुरुषों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2) और 122 के तहत केस दर्ज किया है. ये धाराएं सरकारी कार्य में बाधा डालने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने से संबंधित हैं.
जांच में जुटी पुलिस
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है. वीडियो फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस को कई बार स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ता है. ऐसे मामलों में कानून व्यवस्था बनाए रखना और दोषियों तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है.

