ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा: भारतीयों को ईरान छोड़ने की सलाह, दूतावास ने जारी किए चार आपातकालीन नंबर
“मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की आशंकाओं ने चिंता बढ़ा दी है. हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को तुरंत सतर्क रहने और जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है.”

मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्ते एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं. हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी है. दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए लोगों से कहा है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और लगातार आधिकारिक संपर्क में रहें. यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका द्वारा संभावित सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं. हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक हमले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हालात को बेहद संवेदनशील मान रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में छोटी सी घटना भी बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है.
भारत की एडवाइजरी और हेल्पलाइन अलर्ट
ईरान में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने, भीड़-भाड़ और प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने और जल्द सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है. दूतावास ने कहा है कि सभी भारतीय नागरिक अपने विवरण एम्बेसी में पंजीकृत कराएं और किसी भी आपात स्थिति में जारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें. सरकार ने जनवरी में जारी सुरक्षा एडवाइजरी को भी दोहराया है, जब देश में आंतरिक प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की सख्ती के चलते स्थिति संवेदनशील बनी हुई थी. नई एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है.
भारतीय दूतावास से जारी हेल्पलाइन नंबर
दूतावास ने कहा है कि किसी भी संकट या जानकारी के लिए भारतीय नागरिक तुरंत इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
+98 9128109115
+98 9128109109
+98 9128109102
+98 9932179359
अमेरिका-ईरान तनाव और हमले की अटकलें
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी और सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है. इसी बीच पूर्व सीआईए अधिकारी जॉन किरियाकोऊ ने दावा किया कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि कथित तौर पर अमेरिकी प्रशासन ने रणनीतिक तैयारी पूरी कर ली है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कूटनीतिक दबाव की रणनीति भी हो सकती है, लेकिन यदि सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका असर पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है.
क्यों अहम है यह संकट
ईरान-अमेरिका तनाव का असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है. भारत के लिए ईरान ऊर्जा और रणनीतिक दृष्टि से अहम देश रहा है. यदि हालात बिगड़ते हैं तो तेल आपूर्ति, व्यापार मार्ग और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है. विदेश मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अन्य देशों के साथ समन्वय कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज होंगे, ताकि टकराव को टाला जा सके और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे. फिलहाल भारत सरकार का प्राथमिक फोकस अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है.

