अमेरिकी बाजार में भारतीय टेक्सटाइल को झटका: 28.7% गिरा एक्सपोर्ट, वियतनाम ने मारी बाजी
भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को बड़ा झटका लगा है, खासकर अमेरिका के बाजार में। फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के निर्यात में सालाना आधार पर 28.7% की भारी गिरावट दर्ज की गई है.

भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को बड़ा झटका लगा है, खासकर अमेरिका के बाजार में। फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के निर्यात में सालाना आधार पर 28.7% की भारी गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट न केवल उद्योग के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह एशियाई प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत की कमजोर स्थिति को भी उजागर करती है. जहां एक ओर चीन से आयात में बड़ी गिरावट आई है, वहीं वियतनाम ने इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती वैश्विक मांग, टैरिफ और सप्लाई चेन के कारण भारत को प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेल दिया गया है.
OTEXA रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
Office of Textiles and Apparel के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में अमेरिकी आयात पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला. जहां बांग्लादेश से आयात में 16.4% की गिरावट आई, वहीं वियतनाम ने 5% की वृद्धि दर्ज की. चीन से आयात में 45.2% की बड़ी गिरावट हुई, लेकिन भारत इस अवसर का लाभ नहीं उठा सका. Confederation of Indian Textile Industries के अनुसार, यह रुझान दर्शाता है कि भारत धीरे-धीरे अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी खो रहा है.
टैरिफ राहत का नहीं दिखा असर
अमेरिका द्वारा फरवरी 2026 में अतिरिक्त टैरिफ में राहत दिए जाने के बावजूद इसका सकारात्मक असर भारतीय निर्यात पर अभी तक नहीं दिखा है. निर्यातकों के अनुसार, कई अमेरिकी खरीदार पहले ही जोखिम से बचने के लिए भारत से अपने ऑर्डर हटाकर अन्य देशों की ओर रुख कर चुके हैं. 2025 के दौरान बढ़ी महंगाई, टैरिफ के कारण लागत में वृद्धि और कमजोर उपभोक्ता मांग ने भी इस गिरावट को बढ़ाया है. यही कारण है कि राहत मिलने के बाद भी निर्यात में तेजी नहीं आ पाई है.
उद्योग विशेषज्ञों की राय
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में स्थिति सुधर सकती है. राजलक्ष्मी कॉटन मिल्स के एमडी रजत जैपुरिया के मुताबिक, अभी केवल 40% अमेरिकी ग्राहक ही वापस लौटे हैं. वहीं संजय जैन का कहना है कि टैरिफ हटने का असर डेटा में धीरे-धीरे दिखाई देगा. ऑर्डर से शिपमेंट तक 90-120 दिन का समय लगने के कारण मई-जून से सुधार की उम्मीद की जा रही है.
कंपनियों के मुनाफे पर दबाव
इस गिरावट का सीधा असर टेक्सटाइल कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ा है. अमेरिकी बाजार पर निर्भर कई कंपनियों के मुनाफे (PAT) में 50% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. मांग में कमी, उत्पादन क्षमता का कम उपयोग और बढ़ती लागत ने कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा दिया है. यदि आने वाले महीनों में निर्यात में सुधार नहीं होता, तो उद्योग को और अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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