कैसे बना स्विट्ज़रलैंड दुनिया का सबसे अमीर देश, बिना प्राकृतिक संसाधनों के?
“जब दुनिया के सबसे अमीर देशों की बात होती है, तो स्विट्जरलैंड का नाम हमेशा टॉप-10 में आता है. चाहे फॉर्ब्स की लिस्ट हो या ग्लोबल फाइनेंस मैगज़ीन की रैंकिंग, स्विट्जरलैंड का आर्थिक प्रदर्शन हर बार शानदार रहता है.”

जब दुनिया के सबसे अमीर देशों की बात होती है, तो स्विट्जरलैंड का नाम हमेशा टॉप-10 में आता है. चाहे फॉर्ब्स की लिस्ट हो या ग्लोबल फाइनेंस मैगज़ीन की रैंकिंग, स्विट्जरलैंड का आर्थिक प्रदर्शन हर बार शानदार रहता है. लेकिन सबसे हैरानी की बात ये है कि इसे यह दौलत तेल, सोना या किसी प्राकृतिक संसाधन की वजह से नहीं मिली. और तो और, यहाँ समुद्र का रास्ता भी नहीं है.
स्विट्जरलैंड में ऊँचे पहाड़, उबड़-खाबड़ जमीन और सर्दी-भरी ठंडी हवाएं हैं. खेती करना मुश्किल है और भारी उद्योग भी लगाना आसान नहीं. ऐसे हालात में इसे गरीब देश होना चाहिए था, लेकिन यह दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में शुमार है. इसका राज़ उसकी सटीक आर्थिक और राजनीतिक नीतियों में छुपा है.
देश की आर्थिक नींव – युद्ध से बैंकिंग तक
स्विट्जरलैंड का इतिहास युद्धों से भरा हुआ है. शुरुआती दौर में यहाँ के किसानों ने बड़ी सेनाओं को हराया. 1300 से 1500 के बीच स्विट्ज़ लोग अपनी स्वतंत्रता बचाने के लिए लगातार जंग लड़ते रहे. लेकिन 1500 के बाद स्विट्ज़ लोगों ने तटस्थता की नीति अपनाई. अब वे खुद युद्ध में कम और दूसरे देशों के लिए भाड़े के सैनिक ज़्यादा बन गए.
- स्विस सैनिकों को यूरोप के राजाओं ने जंग में भेजा.
- बदले में उन्हें सोना मिलता.
- कुलीन वर्ग ने इस सोने का इस्तेमाल कर्ज देने और बैंकिंग शुरू करने में किया.
यही था स्विट्ज़ बैंकिंग का पहला कदम. बिना युद्ध के नुकसान उठाए, स्विट्ज़ देश में पैसा भर-भरकर आने लगा.
तटस्थ रहने की नीति – स्विट्ज़ की सबसे बड़ी ताकत
1815 में वियना कांग्रेस ने स्विट्ज़रलैंड की शाश्वत तटस्थता को मान्यता दी. इसका सीधा फायदा यह हुआ कि प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही से स्विट्ज़रलैंड बच गया. देश स्थिर रहा, जबकि यूरोप के बाकी हिस्से लड़ाई और उथल-पुथल में उलझे रहे. वैश्विक पूंजी और निवेश के लिए स्विट्ज़रलैंड सुरक्षित जगह बन गया. युद्धरत देशों ने अपना पैसा स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में जमा करना शुरू कर दिया.
इस तरह, बिना प्राकृतिक संसाधनों के, सही रणनीति और स्थिर नीतियों की वजह से स्विट्ज़रलैंड दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल हो गया.

