कमजोर शरीर, मजबूत हौसला! व्हीलचेयर पर निकले अनशनकारी छात्र, JPSC-JSSC छात्रों ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा
रांची में JPSC-JSSC छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस पर भव्य तिरंगा यात्रा निकाली. कमजोर हो चुके अनशनकारी छात्र भी व्हीलचेयर पर यात्रा में शामिल हुए.


Ranchi: रांची में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर निकली तिरंगा यात्रा ने JPSC-JSSC आंदोलन को देशभक्ति और एकजुटता की तस्वीर से जोड़ दिया. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुई यात्रा में झारखंड के अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों से आए सैकड़ों छात्र शामिल हुए. हाथों में तिरंगा और नारों के बीच छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर जारी आंदोलन के साथ राष्ट्र के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया. यात्रा की सबसे भावुक तस्वीर उन अनशनकारी छात्रों की रही, जो लंबे समय से अनशन के कारण बेहद कमजोर हो चुके हैं. खड़े होकर चलने की स्थिति में नहीं होने के बावजूद उन्हें साथियों ने व्हीलचेयर पर बैठाकर यात्रा में शामिल कराया. इससे आंदोलन के भीतर एकजुटता और साथियों के प्रति जिम्मेदारी की तस्वीर सामने आई. यात्रा ने छात्रों के संघर्ष, अनुशासन और सामूहिक भागीदारी को भी रेखांकित किया.

तिरंगे के साथ सड़क पर उतरे सैकड़ों छात्र
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुई तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए. अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों से पहुंचे आंदोलनकारियों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर यात्रा में भाग लिया. यात्रा कचहरी चौक, सर्कुलर रोड, लालपुर चौक और प्लाजा चौक होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक की ओर बढ़ी. इस दौरान छात्रों में खासा उत्साह नजर आया. कई स्थानों पर बच्चों और युवाओं की मौजूदगी ने भी यात्रा को व्यापक स्वरूप दिया. इस यात्रा को केवल स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम मानना इसके व्यापक संदर्भ को सीमित कर देगा. JPSC-JSSC से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने तिरंगा यात्रा के जरिए अपनी एकजुटता को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया. आंदोलन और राष्ट्रभक्ति को एक साथ सामने रखने की यह कोशिश बताती है कि छात्र अपनी मांगों के साथ-साथ राष्ट्रीय पर्व और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को भी प्रमुखता दे रहे हैं.

व्हीलचेयर पर पहुंचे अनशनकारी, दिखी संघर्ष की गंभीरता
तिरंगा यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान उन छात्रों ने खींचा जो लंबे समय से अनशन पर हैं. लगातार अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो चुकी है और वे सामान्य रूप से चलने की स्थिति में नहीं हैं. इसके बावजूद आंदोलन से उनका जुड़ाव कम नहीं हुआ. साथियों ने उन्हें व्हीलचेयर पर बैठाकर यात्रा में शामिल कराया. यह दृश्य आंदोलन के मानवीय पक्ष को सामने लाता है. एक तरफ छात्र अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आंदोलनकारी अपने कमजोर साथियों को भी पीछे छोड़ने के बजाय उन्हें साथ लेकर चल रहे हैं. स्वयंसेवकों ने यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखा. इससे आंदोलन के भीतर आपसी सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी का संकेत मिला.
देशभक्ति के साथ एकजुटता का संदेश
तिरंगा यात्रा के दौरान हाथों में राष्ट्रीय ध्वज, देशभक्ति के नारों और बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी ने रांची की सड़कों पर अलग माहौल बनाया. छात्रों ने अनुशासन के साथ यात्रा में हिस्सा लेते हुए अपनी एकजुटता प्रदर्शित की. खास बात यह रही कि आंदोलनकारी छात्रों की भागीदारी केवल संख्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि अनशनकारी छात्रों को भी यात्रा का हिस्सा बनाया गया. स्वतंत्रता दिवस के दिन निकली यह यात्रा छात्रों के लिए दो स्तरों पर महत्वपूर्ण रही. एक ओर उन्होंने तिरंगे के माध्यम से देश के प्रति सम्मान व्यक्त किया, तो दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर जारी संघर्ष में एकजुटता दिखाई. कमजोर पड़ चुके अनशनकारी छात्रों का व्हीलचेयर पर यात्रा में शामिल होना इस आंदोलन की गंभीरता और भावनात्मक पक्ष को भी सामने लाता है. इस तरह रांची की तिरंगा यात्रा में देशभक्ति, छात्र एकता और आंदोलन—तीनों पहलू एक साथ दिखाई दिए.

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