1.20 करोड़ में DSP, 1 करोड़ में CO'... आजसू ने खोला 'रेट कार्ड', JPSC पर विधानसभा में महाबवाल
झारखंड विधानसभा के पहले ही दिन JPSC भर्ती विवाद ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया. सदन के बाहर विपक्ष ने सरकार को घेरा, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस कथित 'रेट चार्ट' की रही, जिसमें सरकारी नौकरियों के लिए करोड़ों रुपये तक की डील होने का दावा किया गया.


Ranchi: 1 करोड़ 20 लाख में डीएसपी, 1 करोड़ में सीओ, 90 लाख में बीडीओ, 80 लाख में एफआरओ, 70 लाख में सीजीएल और 39 लाख में दरोगा! झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन के बाहर जब ये कथित 'रेट चार्ट' लहराया गया तो सियासत का पारा चढ़ गया. जेपीएससी और भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले से उबल रहे प्रदेश में इस दावे ने विवाद को और तेज कर दिया. एक ओर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और अनशन जारी है, दूसरी ओर विधानसभा के बाहर विपक्ष ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया. बीजेपी ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे और सीबीआई जांच की मांग उठाई, जबकि आजसू ने दावा किया कि यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पैसों के आधार पर नौकरियां बांटने का खेल था. पहले ही दिन साफ हो गया कि मानसून सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा जेपीएससी और युवाओं का आंदोलन रहने वाला है.
'रेट चार्ट' से मचा सियासी भूचाल
सत्र शुरू होने से पहले सबसे ज्यादा चर्चा उस कथित 'रेट चार्ट' की रही, जिसे लेकर आजसू विधायक विधानसभा पहुंचे. चार्ट में दावा किया गया कि अलग-अलग सरकारी पदों के लिए अलग-अलग रकम तय थी. आरोपों के मुताबिक डीएसपी के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपये, सीओ के लिए 1 करोड़, बीडीओ के लिए 90 लाख, एफआरओ के लिए 80 लाख, सीजीएल के लिए 70 लाख और दरोगा के लिए 39 लाख रुपये तक की कथित डील होती थी. हालांकि, ये सभी दावे आजसू की ओर से लगाए गए आरोप हैं. इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सरकार की ओर से इन्हें स्वीकार नहीं किया गया है.
जेपीएससी पर सड़क से सदन तक संग्राम
जेपीएससी और हाल की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश बना हुआ है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और अनशन लगातार जारी है. अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. इसी मुद्दे को विपक्ष ने विधानसभा के पहले दिन पूरी ताकत से उठाया. बीजेपी विधायकों ने तख्तियां और बैनर लेकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की. सड़क पर चल रहा आंदोलन अब विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बन चुका है.
तिवारी महतो बोले- 'पेपर लीक नहीं, नौकरियां बिक रही थीं'
आजसू के इकलौते विधायक तिवारी महतो अपने गले में कथित रेट चार्ट टांगकर विधानसभा पहुंचे. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के पास इस बात की पूरी जानकारी है कि किस पद के लिए कितनी रकम तय थी. महतो ने कहा कि यह सिर्फ पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को पैसे के दम पर प्रभावित किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जिसने पैसा दिया, वही सफल हुआ और जिसने मेहनत की, वह आज आंदोलन करने को मजबूर है. महतो ने यह भी दावा किया कि बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों ने भी कथित तौर पर पैसे देकर सीटें हासिल कीं. आजसू ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है.

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