ट्रेजरी घोटाला मामले में DDO पर गिरेगी गाज! वित्त मंत्री ने सीएम हेमंत सोरेन से की कार्रवाई की मांग
“झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. वित्त मंत्री ने इस मामले को “वेतन घोटाला” बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बड़ी कार्रवाई की मांग की है. ”

Ranchi: झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. वित्त मंत्री ने इस मामले को “वेतन घोटाला” बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बड़ी कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि बिना DDO (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) की सहमति के वेतन जारी नहीं किया जाता, इसलिए इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में राज्य की वित्तीय व्यवस्था, केंद्र सरकार से लंबित राशि, CSR फंड और विभागीय संसाधनों की कमी जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई. सरकार अब राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और केंद्र पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है. बैठक के बाद ट्रेजरी घोटाले को लेकर कार्रवाई के संकेत मिलने से प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है.
वित्त मंत्री ने ट्रेजरी घोटाले को बताया “वेतन घोटाला”
राज्य सरकार की उच्चस्तरीय बैठक में वित्त मंत्री ने ट्रेजरी घोटाले को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ट्रेजरी घोटाला नहीं बल्कि “वेतन घोटाला” है, क्योंकि किसी भी कर्मचारी का वेतन DDO की अनुमति और सहमति के बाद ही जारी किया जाता है. वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो संबंधित DDO की जवाबदेही तय होनी चाहिए. बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई और प्रशासनिक स्तर पर सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया. सूत्रों के अनुसार सरकार अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराने की तैयारी में है. वित्त विभाग का मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा.
केंद्र सरकार पर वित्तीय सहयोग नहीं देने का आरोप
बैठक के दौरान राज्य की आर्थिक स्थिति और केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड को लेकर भी चर्चा हुई. वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड को उसका बकाया GST भुगतान नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार करोड़ रुपये का GST बकाया अब तक राज्य को नहीं मिला है. इसके अलावा मनरेगा योजना में बदलाव के कारण राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया है. मंत्री ने बताया कि पहले केंद्र और राज्य के बीच 90:10 अनुपात में खर्च होता था, लेकिन योजना का स्वरूप बदलने के बाद अब राज्य सरकार पर लगभग छह हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य की वित्तीय जरूरतों को लेकर सहयोगात्मक रवैया नहीं अपना रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच है कि राज्य अपने संसाधनों के जरिए राजस्व बढ़ाए और केंद्र पर निर्भरता कम करे.
विभागों में संसाधनों और कर्मचारियों की भारी कमी
बैठक में विभिन्न विभागों की समस्याओं को भी मुख्यमंत्री के सामने रखा गया. कमर्शियल टैक्स विभाग की ओर से बताया गया कि विभाग राज्य को लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का टैक्स राजस्व देता है, लेकिन इसके बावजूद यहां 125 पद खाली पड़े हैं. अधिकारियों ने यह भी कहा कि विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और यहां तक कि कई जगहों पर चारपहिया वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं. इस पर मुख्यमंत्री ने विभाग से विस्तृत सूची मांगी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. सरकार का मानना है कि यदि विभागों को पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी मिलें तो राज्य की राजस्व वसूली क्षमता और बेहतर हो सकती है. बैठक में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और खाली पदों को जल्द भरने पर भी जोर दिया गया. इससे राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
CSR फंड की पारदर्शिता पर भी सरकार सख्त
बैठक में CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई. सरकार का कहना है कि राज्य में बड़ी कंपनियां CSR के तहत राशि खर्च तो कर रही हैं, लेकिन इस पर राज्य सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं है. जानकारी के अनुसार अधिकांश कंपनियों ने केवल 12 जिलों में CSR राशि खर्च की है, जबकि उनके मुनाफे और कुल CSR फंड की जानकारी स्पष्ट नहीं है. नियम के मुताबिक कंपनियों को अपने मुनाफे का दो प्रतिशत CSR गतिविधियों पर खर्च करना होता है. बैठक में हिमाचल प्रदेश मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही CSR राशि खर्च की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है. झारखंड सरकार भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है ताकि CSR फंड का उपयोग जरूरतमंद क्षेत्रों में बेहतर तरीके से हो सके.

