परीक्षा में धांधली पर शिकंजा: झारखंड में विशेष अदालत गठित, पूरे राज्य के मामलों की होगी सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित की गई है. इसका कार्यक्षेत्र पूरा झारखंड होगा.

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पेपर लीक, अनुचित साधनों और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई अब विशेष अदालत में होगी. झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची सिविल कोर्ट प्रशासन ने इस दिशा में औपचारिक कदम उठाते हुए एक अदालत को विशेष न्यायालय के रूप में अधिसूचित कर दिया है. अपर न्यायिक आयुक्त-I की अदालत को झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 के तहत विशेष अदालत की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस व्यवस्था का दायरा सिर्फ रांची तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा झारखंड इसका कार्यक्षेत्र होगा. यानी राज्य के किसी भी हिस्से में प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी अनियमितता या अनुचित साधनों के इस्तेमाल का मामला सामने आता है, तो वह इस विशेष न्यायिक व्यवस्था के तहत आ सकता है. सरकार और न्यायपालिका की इस पहल से ऐसे मामलों की सुनवाई को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की उम्मीद है.
रांची सिविल कोर्ट की अदालत को मिली विशेष जिम्मेदारी
रांची के प्रधान न्यायायुक्त की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अपर न्यायिक आयुक्त-I की अदालत को विशेष न्यायालय के तौर पर अधिसूचित किया गया है. यह व्यवस्था ‘द झारखंड कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन (मेजर्स फॉर कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स इन रिक्रूटमेंट) एक्ट, 2023’ के प्रावधानों के तहत की गई है.
पूरे झारखंड के परीक्षा संबंधी मामले आएंगे दायरे में
विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र राज्यभर में रखा गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, अनुचित साधनों के इस्तेमाल या भर्ती प्रक्रिया से संबंधित अन्य गड़बड़ियों के मामलों की सुनवाई इस अदालत में की जा सकेगी. इससे अलग-अलग जिलों में दर्ज मामलों के लिए एक विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।
CIS में अलग श्रेणी में दर्ज होंगे केस
आदेश में मुकदमों की पहचान और रिकॉर्ड को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है. झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 की धारा 26 के तहत आने वाले सभी मामलों को Case Information System (CIS) में ‘Examination Case’ के नाम से दर्ज करना अनिवार्य होगा. इससे ऐसे मामलों की अलग से निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन में मदद मिलेगी.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद लागू हुई व्यवस्था
विशेष अदालत के गठन की प्रक्रिया झारखंड हाईकोर्ट और राज्य सरकार के विधि विभाग की ओर से जारी अधिसूचनाओं के आधार पर पूरी की गई है. इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े मामलों के लिए स्पष्ट न्यायिक ढांचा तैयार करना है. हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों के बीच इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
तेज सुनवाई से अभ्यर्थियों को मिल सकती है राहत
विशेष अदालत बनने से परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है. लंबे समय तक मुकदमे लंबित रहने की स्थिति में अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रिया दोनों पर असर पड़ता है. ऐसे में केंद्रीकृत व्यवस्था से मामलों के त्वरित निपटारे का रास्ता खुल सकता है. साथ ही दोषियों पर कानूनी कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में भी यह व्यवस्था अहम मानी जा रही है.

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