शिकारीपाड़ा में फिर चला बुलडोजर, अवैध खनन पर प्रशासन सख्त
“दुमका के शिकारीपाड़ा में अवैध कोयला खनन पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन खदानों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. हालांकि, माफियाओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम कब लगेगी.”

Dumka : दुमका जिले के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र में अवैध कोयला खनन का मामला एक बार फिर सामने आया है, जहां खनन टास्क फोर्स ने हीरापुर इलाके में चल रही तीन अवैध कोयला खादानों को डोजरिंग कर ध्वस्त कर दिया. यह कार्रवाई जिले के उपायुक्त के निर्देश पर अंचल अधिकारी कपिलदेव ठाकुर के नेतृत्व में की गई. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की कार्रवाई हुई हो. इससे पहले भी कई बार अवैध खनन स्थलों को नष्ट किया गया है, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हो पाई है. क्षेत्र के कई इलाकों में जमीन के नीचे कोयले की मौजूदगी के कारण कोयला माफिया लगातार सक्रिय रहते हैं और मौका मिलते ही फिर से खदान चालू कर अवैध खनन शुरू कर देते हैं. आरोप यह भी है कि प्रशासन केवल खदानों को डोजरिंग कर छोड़ देता है, जबकि इस अवैध कारोबार में शामिल माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती.
स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन को इस समस्या की पूरी जानकारी रहती है, लेकिन कार्रवाई अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है. शिकारीपाड़ा के अंचल अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि यह कार्रवाई उपायुक्त के आदेश पर की गई. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब अवैध खनन करने वालों की पहचान होती है, तो उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जाती. यह स्थिति उस कहावत को चरितार्थ करती है, जिसमें पेड़ की टहनी काट दी जाती है, लेकिन उसकी जड़ को नहीं हटाया जाता.

