'अस्पताल बनाइए... लेकिन हमारी खेती नहीं उजाड़िए! नगड़ी में हजारों लोगों का प्रदर्शन, सरकार को दी खुली चुनौती
नगड़ी में रिम्स-2 निर्माण के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल का निर्माण करें, लेकिन खेती की जमीन छीनकर नहीं। हजारों लोगों ने लोकभवन के सामने प्रदर्शन किया.


Ranchi: नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 के खिलाफ विरोध की लहर लगातार बढ़ती जा रही है. शनिवार को हजारों ग्रामीण लोकभवन के सामने इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से कोई समस्या नहीं है, लेकिन उपजाऊ खेती की जमीन पर रिम्स-2 का निर्माण किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने इस मुद्दे पर उनसे कभी खुलकर बात नहीं की. उनका कहना है कि प्रशासन उनकी चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए विवादित जमीन पर निर्माण कार्य को आगे बढ़ा रहा है. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सरकार से यह मांग की कि रिम्स-2 को किसी गैर-कृषि भूमि पर बनाया जाए, ताकि किसानों की आजीविका पर कोई असर न पड़े.
'इन्हीं खेतों से चलता है हजारों परिवारों का घर'
नगड़ी बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि जिस जमीन पर रिम्स-2 का निर्माण हो रहा है, वह लंबे समय से खेती के लिए उपयोग में लाई जा रही है. इसी जमीन से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी चलती है. समिति की सीता कच्छप ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर किसानों और आदिवासियों की जमीनें छिनी जा रही हैं. उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब गैर-मजरुआ जमीन उपलब्ध है, तो फिर खेती योग्य भूमि का चयन क्यों किया गया? प्रदर्शन में शामिल झारखंड प्रदेश दलित संघ और आदिवासी जनपरिषद के प्रतिनिधियों ने भी कहा कि सरकार को विकास और किसानों की आजीविका के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए. उनका कहना है कि विरोध के बावजूद निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
'विकास चाहिए, लेकिन खेती की कीमत पर नहीं'
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अस्पताल के निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उसकी जगह को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनका मानना है कि अगर रिम्स-2 को किसी दूसरी जगह पर बनाया जाए, तो न केवल विकास होगा, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन भी सुरक्षित रहेगी. इस समय, रिम्स-2 को लेकर सरकार और ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार ग्रामीणों की मांगों पर बातचीत का रास्ता अपनाएगी या विरोध के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाएगी. निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.

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