दिल्ली शराब घोटाला केस: Arvind Kejriwal की बड़ी मांग—क्या जज को हटाने की दलील टिक पाएगी?
दिल्ली की चर्चित Delhi Excise Policy Case में एक नया मोड़ सामने आया है, जहां Arvind Kejriwal ने Delhi High Court में सुनवाई के दौरान जज के रिक्यूजल की मांग उठाई. उन्होंने जस्टिस Swarnakanta Sharma पर निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताई और इस संबंध में कई तर्क पेश किए.

Delhi: दिल्ली की चर्चित Delhi Excise Policy Case में एक नया मोड़ सामने आया है, जहां Arvind Kejriwal ने Delhi High Court में सुनवाई के दौरान जज के रिक्यूजल (खुद को अलग करने) की मांग उठाई. उन्होंने जस्टिस Swarnakanta Sharma पर निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका जताई और इस संबंध में कई तर्क पेश किए. करीब डेढ़ घंटे चली इस बहस में दोनों पक्षों ने जोरदार दलीलें दीं. जहां केजरीवाल ने अपने अधिकार और न्याय की निष्पक्षता का सवाल उठाया, वहीं केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने इस मांग का कड़ा विरोध किया. यह मामला अब सिर्फ शराब नीति विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्षता पर भी बहस का केंद्र बन गया है.
रिक्यूजल की मांग और दलीलें
Arvind Kejriwal ने अदालत में कहा कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर संदेह है, इसलिए जस्टिस Swarnakanta Sharma को इस मामले से अलग हो जाना चाहिए. उन्होंने अपने पक्ष में 10 कारण गिनाए और कहा कि कुछ फैसले बिना उनकी बात सुने लिए गए, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ हैं. केजरीवाल ने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, इसलिए अदालत की निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है.
RSS कनेक्शन पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि ये कार्यक्रम Rashtriya Swayamsevak Sangh से जुड़े संगठनों के थे. केजरीवाल ने कहा कि उनकी विचारधारा अलग है और जज की इन कार्यक्रमों में मौजूदगी से उन्हें निष्पक्षता पर संदेह हुआ. हालांकि, जस्टिस शर्मा ने पूछा कि क्या उन कार्यक्रमों में कोई राजनीतिक बयान दिया गया था, जिस पर केजरीवाल ने कहा कि सिर्फ उपस्थिति ही चिंता का कारण है.
सरकार की ओर से कड़ा विरोध
केंद्र सरकार की ओर से Tushar Mehta ने केजरीवाल की मांग का विरोध किया. उन्होंने कहा कि किसी जज की अंतरिम टिप्पणियों से असहमति होना, उन्हें मामले से हटाने का आधार नहीं बन सकता. मेहता ने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की मांगों को स्वीकार किया गया, तो यह “जज शॉपिंग” को बढ़ावा देगा. उन्होंने अदालत से इस मांग को खारिज करने की अपील की और कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए.
पुराने आदेशों का हवाला
Arvind Kejriwal ने जस्टिस शर्मा के पिछले आदेशों का भी जिक्र किया, जिसमें Satyendar Jain के मामले में ट्रायल कोर्ट के जज को बदलने की अनुमति दी गई थी. उन्होंने कहा कि अदालत की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष पहले से पक्षपाती नजर आते हैं. साथ ही, उन्होंने शराब नीति मामले में जांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने के फैसले पर भी सवाल उठाए. इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने अपनी आशंका को मजबूत करने की कोशिश की.
मामले का बढ़ता दायरा
यह मामला अब सिर्फ Delhi Excise Policy Case तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायिक निष्पक्षता और प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है. अदालत में हुई बहस ने यह दिखाया कि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर मजबूती से खड़े हैं. आने वाले समय में अदालत का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा. यह देखना अहम होगा कि क्या जज खुद को अलग करते हैं या फिर सुनवाई इसी पीठ के सामने जारी रहती है.

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