Jamshedpur: पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को पत्र लिखकर जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में अजीत महतो की पुलिस हिरासत में हुई मौत की स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह घटना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन प्रतीत होती है. पत्र में यह भी बताया गया कि मृतक के परिजनों से केवल ₹2,00,000 की राशि सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाकर दी गई. इस प्रक्रिया का कोई स्पष्ट वैधानिक आधार नहीं था, जिससे मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने NHRC से आग्रह किया कि पुलिस अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
न्याय और पारदर्शिता की मांग
अर्जुन मुंडा ने यह भी कहा कि मृतक परिवार को सम्मानजनक मुआवजा, पुनर्वास और सुरक्षा प्रदान करना आयोग की प्राथमिकता हो. उन्होंने भरोसा जताया कि NHRC इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करेगा. पुलिस हिरासत में किसी नागरिक की मृत्यु मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन मानी जाती है. बीते वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, लेकिन अक्सर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई में देरी देखी गई है. इसलिए इस मामले में त्वरित और न्यायपूर्ण कार्रवाई बेहद आवश्यक है.
गिरफ्तारी और परिवार पर असर
गिरफ्तारी के बाद लगभग दो दिन तक मृतक के परिजनों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई. इसी अवधि में मृतक की गर्भवती पत्नी ने नवजात बच्ची को जन्म दिया, जो परिवार के लिए गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट बन गया. पूर्व मुख्यमंत्री ने NHRC से कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर विधिक और विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए. मृतक परिवार को पूर्ण मुआवजा और सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना चाहिए. यह कदम अन्य पुलिस हिरासत मामलों में भी उदाहरण बनेगा.
Suo Moto Cognizance और न्यायिक जांच
अर्जुन मुंडा ने आयोग से आग्रह किया कि यह मामला Suo Moto Cognizance लेते हुए जांच का विषय बने. ऐसी जांच से दोषियों की पहचान और त्वरित न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी. पत्र में यह भी कहा गया कि मृतक परिवार को पुनर्वास और उचित मुआवजा मिलना चाहिए. नवजात बच्ची और गर्भवती पत्नी की सुरक्षा सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारी होनी चाहिए. इस कदम से मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में संदेश और चेतावनी भी जाएगी.
मानवाधिकार और मतदान अधिकार
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पात्र भारतीय नागरिक ही मतदान का अधिकार पाएँ. मानवाधिकार के उल्लंघन के मामलों में तुरंत हस्तक्षेप आवश्यक है. अर्जुन मुंडा ने विश्वास जताया कि NHRC इस मामले में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करेगा. यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण और चेतावनी बनेगा. ऐसे कदम से नागरिकों का विश्वास सरकारी संस्थाओं पर और मजबूत होगा.


