हेमंत सोरेन को आदित्य साहू का पत्र, भाषा विवाद पर उठाए सवाल, सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
“झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को पत्र लिखकर राज्य में बढ़ते भाषा विवाद पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान सदियों से विविध भाषाओं और संस्कृतियों के सह-अस्तित्व की रही है, लेकिन हाल के सरकारी निर्णयों के चलते यह संतुलन बिगड़ने की आशंका है.”

Ranchi: झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष Aditya Sahu ने मुख्यमंत्री Hemant Soren को पत्र लिखकर राज्य में बढ़ते भाषा विवाद पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान सदियों से विविध भाषाओं और संस्कृतियों के सह-अस्तित्व की रही है, लेकिन हाल के सरकारी निर्णयों के चलते यह संतुलन बिगड़ने की आशंका है. खासकर शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान भाषा को लेकर पैदा हुए विवाद को उन्होंने युवाओं के भविष्य के लिए खतरनाक बताया है. साहू ने सरकार से इस मुद्दे पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने और सभी वर्गों को साथ लेकर समाधान निकालने की अपील की है.
भाषा विवाद से सामाजिक ताने-बाने पर खतरे की आशंका
आदित्य साहू ने अपने पत्र में लिखा है कि झारखंड सहिष्णुता और समरसता का प्रतीक रहा है, जहां विभिन्न भाषाएं और संस्कृतियां साथ-साथ विकसित हुई हैं. लेकिन हाल में राज्य सरकार की नीतियों के कारण भाषा को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है, जो सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया अब आगे बढ़ रही है, लेकिन इसमें भाषा को लेकर उठे विवाद से स्थिति और जटिल हो गई है. इससे राज्य एक बार फिर भाषा विवाद में उलझ सकता है.
स्थानीय भाषाओं की अनदेखी से बढ़ रहा असंतोष
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नई नीति के तहत कई जिलों में स्थानीय भाषाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है. सीमावर्ती क्षेत्रों में उर्दू, बंगाली, ओड़िया, मगही, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है. साहू ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है और पहले से बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के सामने एक नई समस्या खड़ी हो रही है. उन्होंने सरकार से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत कदम उठाकर भाषा विवाद को खत्म किया जाए.

