हर मुद्दे पर 'चिट्ठी' लिखने वाले बाबूलाल मरांडी राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर क्यों खामोश? JMM ने BJP से पूछे असहज सवाल
झारखंड में राम मंदिर विवाद को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। JMM ने भाजपा और बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि वे इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि जो नेता हर मुद्दे पर चिट्ठी लिखते हैं, उनकी आवाज इस बार क्यों नहीं उठ रही।

Ranchi: झारखंड की राजनीति में अगर किसी नेता की पहचान हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सरकार को चिट्ठी लिखने वाले नेता के तौर पर बनी है, तो वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी हैं. कानून-व्यवस्था हो, भ्रष्टाचार हो, नियुक्ति घोटाला हो या प्रशासनिक लापरवाही—बाबूलाल मरांडी अक्सर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जवाब मांगते रहे हैं. लेकिन इस बार मामला राम मंदिर और करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़ा है, और यहीं से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भाजपा को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश शुरू कर दी है.
JMM ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से सीधा सवाल दागते हुए पूछा है कि भगवान राम के नाम पर सबसे ज्यादा राजनीति करने वाली भाजपा आखिर राम मंदिर में चढ़ावे और व्यवस्थाओं को लेकर उठे विवाद पर चुप क्यों है? पार्टी ने तंज कसते हुए बाबूलाल मरांडी का नाम लिया और पूछा कि हर मुद्दे पर चिट्ठी लिखने वाले नेता की कलम इस बार क्यों रुक गई? क्या सवाल पूछने का अधिकार सिर्फ विपक्ष तक सीमित है?
JMM ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा को हर मुद्दे पर धर्म खतरे में दिखाई देता था, लेकिन जब राम मंदिर से जुड़े प्रबंधन और श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तब भाजपा का पूरा नेतृत्व "मौन व्रत" पर दिखाई दे रहा है. पार्टी ने बाबूलाल मरांडी को टैग करते हुए पूछा कि क्या इस बार एक चिट्ठी भी नहीं लिखी जाएगी?
दरअसल, हाल के दिनों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल और आरोप सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने हैं. विपक्षी दल इसी मुद्दे को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं. JMM का तर्क है कि यदि भाजपा खुद को भगवान राम और रामभक्तों की सबसे बड़ी हितैषी बताती है, तो उसे इस पूरे विवाद पर भी उतनी ही मुखरता दिखानी चाहिए, जितनी वह दूसरे मुद्दों पर दिखाती रही है.
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि JMM का यह हमला केवल राम मंदिर विवाद तक सीमित नहीं है. असल निशाना बाबूलाल मरांडी की वही राजनीतिक शैली है, जिसमें वे लगातार सरकार से जवाब मांगते रहे हैं. JMM अब उसी शैली को भाजपा के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है और यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि जो नेता हर मुद्दे पर जवाब मांगते हैं, उन्हें अपने राजनीतिक असहज सवालों का जवाब भी देना चाहिए.
फिलहाल भाजपा या बाबूलाल मरांडी की ओर से JMM के इस हमले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि यह साफ है कि राम मंदिर का मुद्दा अब सिर्फ धार्मिक या प्रशासनिक बहस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड की राजनीति में भाजपा और JMM के बीच नए सियासी टकराव का हथियार भी बनता जा रहा है.

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