परिसीमन पर आदिवासी प्रतिनिधिमंडल की AICC प्रभारी के. राजू से मुलाकात, आरक्षित सीटों की सुरक्षा और बढ़ोतरी की मांग
झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने एआईसीसी प्रभारी के. राजू से मुलाकात कर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की सुरक्षा और समानुपातिक बढ़ोतरी की मांग उठाई.

Ranchi: झारखंड में परिसीमन (Delimitation) को लेकर आदिवासी समाज की राजनीतिक भागीदारी और आरक्षित सीटों की सुरक्षा का मुद्दा तेज हो गया है. शनिवार को पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रांची स्थित राज्य अतिथि गृह में एआईसीसी झारखंड प्रभारी के. राजू से मुलाकात की. बैठक में अनुसूचित जनजाति (ST) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और परिसीमन के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि परिसीमन के दौरान आदिवासी आरक्षित सीटों में किसी भी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए.
प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषिश रशीक सोरेन, डॉ. रामचंद्र उरांव, अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की समेत झारखंड के सभी 24 जिलों के प्रतिनिधि शामिल थे. बैठक में बंधु तिर्की ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल जल्द ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर परिसीमन को लेकर अपनी चिंताओं और सुझावों से अवगत कराना चाहता है. उन्होंने के. राजू से इस मुलाकात की व्यवस्था कराने का आग्रह किया. साथ ही 30 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित 'आदिवासी एकता महाजुटान रैली' में राहुल गांधी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की भी मांग की.
बैठक में शशि पन्ना ने सुझाव दिया कि यदि भविष्य में लोकसभा और विधानसभाओं की कुल सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि होती है, तो अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए. वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषिश रशीक सोरेन और डॉ. रामचंद्र उरांव ने परिसीमन से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए कहा कि उचित विधिक प्रावधानों के माध्यम से आदिवासी आरक्षित सीटों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.
प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद एआईसीसी प्रभारी के. राजू ने आश्वासन दिया कि वह इस मुद्दे पर राहुल गांधी के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक कराने का प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा बेहद जरूरी है और यदि लोकसभा व विधानसभा की कुल सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़नी चाहिए. बैठक के दौरान केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने सरना धर्म कोड का मुद्दा भी उठाया और कांग्रेस से इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया. बैठक का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

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