मरांग बुरू पहाड़ पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा महासम्मेलन में उठा, समापन समारोह में शामिल हुए सीएम हेमंत सोरेन
गिरिडीह के पीरटांड़ स्थित मरांग बुरू धोरोमगढ़ महासम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन शामिल हुए. संताली भाषा में संबोधन के दौरान सीएम ने आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया.

Madhuban: पीरटांड़ पहाड़ विवाद को लेकर आयोजित मरांग बुरू धोरोमगढ़ महासम्मेलन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए. मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं. महासम्मेलन में आदिवासी समाज के अधिकारों, परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता को लेकर चर्चा हुई. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फागू बेसरा ने मरांग बुरू पहाड़ पर आदिवासी समुदाय के अधिकारों के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया.
संताली भाषा में सीएम ने किया संबोधित
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभा को संताली भाषा में संबोधित किया. उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक सम्मेलन है, जहां समाज को और मजबूत बनाने तथा उसके विकास को लेकर विचार-विमर्श किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर समाज अपने प्रति जिम्मेदार होता है और अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करता है. आदिवासी समाज भी अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत है.
आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आदिवासियों को मिले संवैधानिक अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में आदिवासी समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. पांचवीं अनुसूची और छठी अनुसूची जैसे प्रावधान आदिवासी हितों और अधिकारों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि देश में ऐसे भी कानूनी प्रावधान हैं, जहां आदिवासियों की सहमति के बिना निर्णय नहीं लिया जा सकता.
प्रकृति के साथ आदिवासी समाज के रिश्ते पर जोर
हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के साथ रचा-बसा है. इस समाज की अपनी विशिष्ट पहचान और परंपराएं हैं. सभी समाजों का सम्मान करते हुए आदिवासी समुदाय को भी अपने सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए आगे बढ़ना चाहिए. मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि इस तरह के आयोजन से समाज को मजबूती मिलेगी और आदिवासी समुदाय अपनी एकजुटता के साथ आगे बढ़ेगा.

