मरांग बुरु धर्मगाढ़ महासम्मेलन में पहुंचे CM हेमंत सोरेन, कार्यक्रम को करेंगे संबोधित
गिरिडीह के मधुबन स्थित मरांग बुरु में दो दिवसीय धर्मगाढ़ महासम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहुंचे. सम्मेलन में आदिवासी धार्मिक पहचान, पूजा पद्धति और मरांग बुरु पर अधिकार की मांग उठी. वहीं, फागू बेसरा ने बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधते हुए 2018 के फैसले को लेकर सवाल खड़े किए.

Giridih: पारसनाथ की पहाड़ियों में स्थित मरांग बुरु एक बार फिर आदिवासी आस्था, परंपरा और अधिकारों की आवाज का केंद्र बन गया है. पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन स्थित मरांग बुरु में आयोजित दो दिवसीय मरांग बुरु धर्मगाढ़ महासम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहुंच चुके हैं. वे यहां महासम्मेलन को संबोधित करेंगे. 4 और 5 नवंबर को आयोजित इस महासम्मेलन में संथाल समाज के प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी हो रही है. देश के अलग-अलग राज्यों से आदिवासी प्रतिनिधियों के जुटने के बीच इस आयोजन का महत्व धार्मिक और सामाजिक, दोनों रूपों में बढ़ गया है. सम्मेलन में आदिवासी पहचान, पारंपरिक पूजा पद्धति, धार्मिक अधिकार और मरांग बुरु की पहचान को लेकर उठ रही मांगें प्रमुख चर्चा का विषय हैं.
आदिवासी आस्था और पहचान का बड़ा मंच बना महासम्मेलन
मरांग बुरु संथाल आदिवासी समाज के लिए केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि उनके ईष्टदेव, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है. पीढ़ियों से संथाल समाज यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करता आया है. महासम्मेलन का उद्देश्य आदिवासी धर्म, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना है. आयोजकों की ओर से विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है. संथाल समाज की मांग है कि मरांग बुरु को आदिवासियों का धार्मिक तीर्थस्थल घोषित किया जाए और यहां की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था को कानूनी संरक्षण मिले.
फागू बेसरा ने बाबूलाल मरांडी पर साधा निशाना
महासम्मेलन के दौरान मरांग बुरु के अधिकार और धार्मिक परंपराओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. फागू बेसरा ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने सवाल उठाया कि बाबूलाल मरांडी का मरांग बुरु को लेकर आखिर क्या नजरिया है? फागू बेसरा ने आरोप लगाया कि 2018 में बीजेपी सरकार के कार्यकाल में ही मरांग बुरु को जैन समुदाय के तीर्थस्थल के रूप में स्थापित करने से जुड़ा आदेश जारी हुआ था. उन्होंने बाबूलाल मरांडी की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को उठाकर राजनीतिक प्रोपेगेंडा खड़ा करते हैं.
पूजा पद्धति और धार्मिक अधिकारों पर भी उठी आवाज
फागू बेसरा ने आदिवासी और जैन समुदाय की अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि हर समुदाय को अपनी पूजा पद्धति का पालन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए. उन्होंने पारंपरिक बलि प्रथा का समर्थन करते हुए कहा कि संथाल समाज में ईष्टदेव की पूजा निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार होती है. उनका कहना है कि आदिवासी समाज पर किसी दूसरे समुदाय की धार्मिक परंपरा थोपना स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने मरांग बुरु में कथित अतिक्रमण हटाने और संथाल समाज के धार्मिक अधिकारों को सुरक्षित करने की मांग भी उठाई. अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संबोधन पर टिकी हैं कि वे मरांग बुरु की धार्मिक पहचान, संरक्षण और आदिवासी समाज की मांगों को लेकर क्या संदेश देते हैं.

