खनिज सेस पर सुदेश महतो का बड़ा बयान, JMM से बोले- पहले 10 हजार करोड़ का हिसाब दो
10 हजार करोड़ के DMFT फंड को लेकर सुदेश महतो ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने खनिज क्षेत्रों के लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पेयजल जैसी सुविधाओं पर फंड खर्च करने की मांग की.


Ranchi: झारखंड में खनिज संसाधनों पर सेस लगाने के मुद्दे ने एक बार फिर सियासी बहस तेज कर दी है. आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खनिज संपदा से होने वाली आय का सीधा लाभ खनिज प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधारना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. सुदेश महतो ने करीब 10 हजार करोड़ रुपये के DMFT फंड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और इसके प्रभावी उपयोग की मांग की. उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य को खनिज क्षेत्रों के लिए सेस लगाने की अनुमति देने की अपील की, लेकिन साथ ही कहा कि इस राशि का इस्तेमाल स्थानीय लोगों के विकास के लिए सुनिश्चित होना चाहिए.
खनिज का पैसा स्थानीय लोगों पर खर्च हो
सुदेश महतो ने कहा कि झारखंड के गठन के पीछे जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों का इस्तेमाल राज्य के लोगों के हित में करने की सोच थी. ऐसे में खनिज क्षेत्रों से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा उन्हीं इलाकों के विकास पर खर्च होना चाहिए, जहां से ये संसाधन निकलते हैं. उन्होंने कहा कि खनिज प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्कूल, अस्पताल, रोजगार और शुद्ध पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता से काम होना चाहिए. उनका कहना है कि खनिज संसाधनों से होने वाली आय का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के बजाय स्थानीय विकास के लिए किया जाना चाहिए.
DMFT फंड पर भी उठाए सवाल
सुदेश महतो ने करीब 10 हजार करोड़ रुपये के DMFT फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि इस फंड का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है. उन्होंने सुझाव दिया कि इस राशि से स्कूलों में बच्चों को किताबें, पोशाक और छात्रवृत्ति दी जाए. कुपोषित बच्चों और महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और हर घर तक साफ पेयजल पहुंचाने पर भी फंड खर्च किया जाना चाहिए. सुदेश महतो ने आरोप लगाया कि DMFT की राशि का उपयोग उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं हो रहा है. उन्होंने सरकार से फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी की मांग की.
सेस और कोयला उत्पादन पर सरकार को घेरा
खनिज सेस को लेकर सुदेश महतो ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के विरोध पर भी सवाल उठाए. उन्होंने राज्य में अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगने का आरोप लगाया. साथ ही कहा कि वैध तरीके से उत्पादित कोयले पर अतिरिक्त बोझ डालने से इसकी कीमत बढ़ सकती है और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलने का खतरा है. उन्होंने कोयला उत्पादन की वृद्धि दर का हवाला देते हुए दावा किया कि सेस लगाए जाने से पहले वार्षिक वृद्धि करीब 8 प्रतिशत थी, जबकि इसके बाद यह करीब 2 प्रतिशत रह गई. उनके मुताबिक इससे खनिज संसाधनों के प्रबंधन और सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं.
बजट खर्च पर भी साधा निशाना
सुदेश महतो ने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया कि खनिज सेस नहीं मिलने से विकास योजनाओं के लिए धन की कमी हो सकती है. उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट खर्च के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कई विभाग अपने आवंटित बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाए. उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण विकास विभाग में करीब 40 प्रतिशत, आदिवासी कल्याण से जुड़ी योजनाओं में करीब 52 प्रतिशत और पेयजल विभाग में करीब 56 प्रतिशत बजट ही खर्च हो पाया. स्वास्थ्य विभाग में यह आंकड़ा करीब 78 प्रतिशत बताया गया.
सुदेश महतो ने कहा कि सरकार के सामने सिर्फ अतिरिक्त राजस्व जुटाने की चुनौती नहीं है, बल्कि उपलब्ध राशि को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से खर्च करना भी जरूरी है. उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र के साथ बातचीत कर तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखने की अपील की. साथ ही कहा कि आजसू पार्टी खनिज क्षेत्रों के लोगों के हित में संवाद और सहयोग के पक्ष में है.

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