बारिश में भी प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थी, नौकरी बचाने की लड़ाई तेज
रांची में लगातार बारिश के बीच JSSC-CGL से चयनित अभ्यर्थियों का प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन जारी है. नियुक्तियां रद्द किए जाने का विरोध कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि गड़बड़ी के दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन बिना व्यक्तिगत भूमिका साबित किए करीब 2000 लोगों की नौकरी नहीं छीनी जानी चाहिए.

Ranchi: राजधानी रांची में लगातार बारिश के बावजूद JSSC-CGL से चयनित अभ्यर्थियों का प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन जारी है. नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में चयनित कर्मचारी सड़क पर डटे हुए हैं. उनका कहना है कि सरकार ने जिस प्रक्रिया के तहत उन्हें नियुक्ति दी, उसी नियुक्ति को अब एक फैसले के जरिए खत्म किया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि अगर परीक्षा या चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित लोगों पर तय की जाए, लेकिन बिना व्यक्तिगत भूमिका साबित किए करीब 2000 चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी क्यों छीनी जा रही है. अभ्यर्थियों का कहना है कि कई लोगों ने JSSC-CGL में चयन के बाद अपनी पुरानी सरकारी नौकरियां तक छोड़ दी थीं. अब उनके सामने नौकरी और भविष्य दोनों का संकट है. सरकार से फैसला वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने आंदोलन और तेज करने तथा जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है.
बारिश तेज हुई, लेकिन प्रोजेक्ट भवन के बाहर नहीं हटी भीड़
JSSC-CGL से चयनित कर्मचारी मंगलवार को लगातार बारिश के बीच प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन करते रहे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मौसम खराब होने के बावजूद वे यहां से हटने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि मामला उनके रोजगार और भविष्य से जुड़ा है. अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले की स्पष्ट लिखित जानकारी तक नहीं दी गई है. इसके बावजूद सरकार के निर्णय से उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है. उनका कहना है कि वर्षों तक परीक्षा और कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के बाद उन्हें नियुक्ति मिली थी. अब अचानक नियुक्ति खत्म किए जाने से वे खुद को ऐसी स्थिति में पा रहे हैं, जहां आगे का रास्ता स्पष्ट नहीं है.
'गड़बड़ी हुई तो दोषी को सजा दें, सभी की नौकरी क्यों जाए?'
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का तर्क है कि अगर जांच में कुछ उम्मीदवारों की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई उन्हीं के खिलाफ होनी चाहिए. पूरी चयन प्रक्रिया में शामिल सभी अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है. उन्होंने नियुक्ति आदेश की उस शर्त का भी हवाला दिया, जिसके तहत जांच में किसी अभ्यर्थी के व्यक्तिगत तौर पर अनियमितता में शामिल पाए जाने पर उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है. इसी आधार पर प्रदर्शनकारी पूछ रहे हैं कि जब व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने का रास्ता मौजूद है, तो पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को ही खत्म करने का फैसला क्यों लिया गया.
कई अभ्यर्थियों ने पुरानी नौकरी छोड़कर ज्वाइन की थी
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों के मुताबिक, JSSC-CGL से नियुक्त हुए करीब 2000 अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो पहले से नौकरी कर रहे थे. कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि उनके पास केंद्र सरकार, रेलवे या दूसरे राज्यों की सरकारी नौकरी थी. झारखंड में सेवा करने और अपने गृह राज्य लौटने की उम्मीद में उन्होंने पुरानी नौकरी छोड़कर JSSC-CGL के जरिए मिली नियुक्ति स्वीकार की. अब नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने नई नौकरी गंवाने के साथ पुरानी नौकरी में वापस लौटने की मुश्किल भी खड़ी हो गई है.
नौकरी बचाने के लिए कोर्ट जाएंगे, आमरण अनशन की चेतावनी
चयनित अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि वे सरकार के फैसले के खिलाफ न्यायालय का रुख करेंगे. उनका कहना है कि अब उन्हें न्यायपालिका से उम्मीद है कि उनकी नियुक्ति और व्यक्तिगत भूमिका से जुड़े सभी पहलुओं पर निष्पक्ष विचार होगा. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियुक्तियां रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांग पर विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है. फिलहाल लगातार बारिश के बीच प्रोजेक्ट भवन के बाहर चयनित अभ्यर्थी डटे हुए हैं. उनकी मांग साफ है—अगर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन बिना दोष साबित हुए उनकी नौकरी न छीनी जाए.

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