संजय राउत का बागी सांसदों पर हमला, सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है. दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राउत ने बागी सांसदों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया और उन पर पार्टी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया.

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है. दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राउत ने बागी सांसदों के लिए कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया और उन पर पार्टी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया. इतना ही नहीं, उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति के लिए सुप्रीम कोर्ट को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं को रोकने में अदालत विफल रही है. राउत के बयान ऐसे समय आए हैं जब शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के पार्टी से अलग होने की अटकलें तेज हैं. संसदीय दल की बैठक में उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. पार्टी अब इन सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है.
बागी सांसदों पर बरसे संजय राउत
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने बागी सांसदों को लेकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की. पत्रकारों ने जब उनसे इन सांसदों को मिली सुरक्षा और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल किया तो राउत ने कहा कि जो नेता पार्टी छोड़कर गए हैं, उन्हें जनता के बीच उसी तरह जाना चाहिए जैसे वे शिवसेना (यूबीटी) के साथ रहते हुए जाते थे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब वे भारी सुरक्षा घेरे में घूम रहे हैं और ऐसा व्यवहार कर रहे हैं मानो उन्हें कोई बड़ा सम्मान मिल गया हो. राउत का कहना था कि जिन नेताओं ने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीत हासिल की, वे अब उसी पार्टी के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं. उनके मुताबिक यह केवल राजनीतिक असहमति नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के साथ किया गया विश्वासघात है. उनके बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट पर भी साधा निशाना
संजय राउत ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट पर भी गंभीर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में जो राजनीतिक घटनाक्रम पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला, उसे रोकने में न्यायपालिका की भूमिका संतोषजनक नहीं रही. राउत के अनुसार यदि समय रहते उचित फैसले लिए गए होते तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाली घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से राजनीतिक दलों में टूट-फूट को बढ़ावा मिला है. राउत ने कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का इस तरह दल बदलना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है. उनके मुताबिक अदालतों को ऐसे मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी. हालांकि उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई बहस शुरू हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं.
बैठक से गायब रहे छह सांसद, कार्रवाई की तैयारी
गुरुवार को शिवसेना (यूबीटी) ने दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई थी, लेकिन बैठक में लोकसभा के केवल तीन सांसद ही पहुंचे. अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे की मौजूदगी के बीच बाकी छह सांसदों की गैरहाजिरी चर्चा का विषय बन गई. बैठक के बाद संजय राउत ने स्पष्ट किया कि जो सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए, उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी और उनसे जवाब मांगा जाएगा. राउत ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी उनकी सदस्यता रद्द करने की संभावना पर विचार कर सकती है. उनका कहना था कि पार्टी के अधिकृत मंच से दूरी बनाना और समानांतर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. इस कदम से शिवसेना (यूबीटी) और बागी सांसदों के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
बीजेपी पर लगाया राजनीति को गंदा करने का आरोप
संजय राउत ने अपने बयान के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने विशेष रूप से महाराष्ट्र की राजनीति को अस्थिर और दूषित करने का काम किया है. राउत के मुताबिक राजनीतिक दलों में टूट-फूट, विधायकों और सांसदों के पाला बदलने जैसी घटनाओं के पीछे बीजेपी की रणनीति जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति लोकतंत्र को कमजोर करती है और जनता के जनादेश का अपमान करती है. राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र की जनता इन घटनाओं को देख रही है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक जवाब भी देगी. उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों की एक कीमत होती है और वह कीमत बीजेपी को भविष्य में चुकानी पड़ेगी. उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की सियासत में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के दौर को और तेज कर दिया है.

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