रथ यात्रा 2026: आज एकांतवास से बाहर आएंगे महाप्रभु, नेत्रदान महोत्सव से शुरू होगा भक्ति का महाउत्सव
रांची में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा से पहले आज नेत्रदान महोत्सव का आयोजन होगा. एकांतवास से बाहर आने के बाद भगवान भक्तों को दर्शन देंगे. 108 दीपों की मंगल आरती, विशेष पूजा-अर्चना और गुरुवार को निकलने वाली भव्य रथ यात्रा को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.


Ranchi: भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा से पहले बुधवार को श्रद्धालुओं का लंबे इंतजार खत्म होगा. स्नान पूर्णिमा के बाद करीब पंद्रह दिनों के एकांतवास (अनासार काल) में रहने वाले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा आज भक्तों को फिर से दर्शन देंगे. इसी के साथ नेत्रदान (नेत्रोत्सव) महोत्सव का आयोजन होगा, जिसे रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत माना जाता है. रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. गुरुवार को निकलने वाली भव्य रथ यात्रा के लिए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं. सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और मेला व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं. माना जाता है कि भगवान के पुनः दर्शन के साथ भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और इसी दिन से रथ यात्रा का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है.
आज होगा नेत्रदान महोत्सव, 108 दीपों से विशेष आरती
बुधवार को दोपहर बाद भगवान को एकांतवास से बाहर लाकर विशेष श्रृंगार किया जाएगा. इसके बाद शाम को मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे और नेत्रदान महोत्सव का आयोजन होगा. भगवान के नए स्वरूप के दर्शन के बाद 108 दीपों से मंगल आरती, विशेष भोग, विष्णु अष्टकम और गीता पाठ होगा. इस अनुष्ठान को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है. परंपरा के अनुसार स्नान यात्रा के बाद भगवान अस्वस्थ माने जाते हैं और एकांतवास के बाद नेत्रदान के साथ पुनः सार्वजनिक दर्शन देते हैं.
गुरुवार को निकलेगी ऐतिहासिक रथ यात्रा
गुरुवार सुबह मंदिर के पट तड़के खुलेंगे और दोपहर तक दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा. इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को भव्य लकड़ी के रथ पर विराजमान किया जाएगा. निर्धारित समय पर श्रद्धालु रस्सियों से रथ खींचते हुए मौसीबाड़ी तक लेकर जाएंगे. शाम तक भगवान मौसीबाड़ी पहुंचेंगे, जहां विशेष पूजा-अर्चना और आरती होगी. रांची की यह रथ यात्रा सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है और इसकी धार्मिक विधियां काफी हद तक पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा की परंपरा का अनुसरण करती हैं.
10 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद
रथ यात्रा और मेले में इस वर्ष करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है. इसे देखते हुए मंदिर परिसर और रथ मार्ग पर सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, अलग प्रवेश और निकास मार्ग, मेडिकल टीम, एंबुलेंस, पेयजल, मोबाइल शौचालय, बिजली और ट्रैफिक प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है. पुलिस बल, मजिस्ट्रेट और स्वयंसेवकों की तैनाती भी की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके.
पारंपरिक बाजार बना आकर्षण का केंद्र
रथ यात्रा के साथ लगने वाला पारंपरिक मेला भी पूरी तरह सज चुका है. मेले में घरेलू सामान, स्टील और लोहे के बर्तन, खिलौने, पूजा सामग्री, पारंपरिक वाद्य यंत्र, मिठाइयां और स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानें श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं. बच्चों के लिए झूले, मीना बाजार और मनोरंजन के कई साधन लगाए गए हैं. खानपान के स्टॉल भी तैयार हैं, जहां स्थानीय व्यंजनों के साथ पारंपरिक मिठाइयों की बिक्री शुरू हो चुकी है. रथ यात्रा के दिन से मेले में सबसे अधिक भीड़ उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

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