Ranchi Politics: सुप्रियो भट्टाचार्य का केंद्र सरकार पर हमला, 12 साल के कार्यकाल को लेकर उठाए कई सवाल
“रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों और फैसलों की आलोचना की. उन्होंने कृषि, रोजगार, शिक्षा, बैंकिंग और संस्थागत व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की.”

रांची में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल पर कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने विभिन्न नीतियों, योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार की आलोचना की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कृषि, बैंकिंग, रोजगार, शिक्षा, सरकारी संस्थानों और विदेश नीति जैसे कई मुद्दों का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए. इस दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया और दावा किया कि पिछले एक दशक में देश में विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अनियमितताएं हुई हैं. सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, किसानों की स्थिति, युवाओं के रोजगार और शिक्षा व्यवस्था जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है. उन्होंने केंद्र सरकार से इन मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग भी की. प्रेस वार्ता में उनके बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने रहे.
कृषि और किसान मुद्दों को लेकर साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान सुप्रियो भट्टाचार्य ने किसानों की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि क्षेत्र में लाभ और सब्सिडी वितरण को लेकर असमानता देखने को मिल रही है. उनका कहना था कि एक ओर किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ लोगों को विशेष लाभ पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने किसानों की आत्महत्या और बढ़ते कर्ज के मुद्दे को भी गंभीर चिंता का विषय बताया.
नोटबंदी, बैंकिंग और सरकारी संपत्तियों पर सवाल
झामुमो नेता ने नोटबंदी के फैसले को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि इस कदम के प्रभावों पर आज भी बहस जारी है. इसके अलावा उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में हुए बदलावों, बैंकों के विलय और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप था कि इन नीतियों का असर आम नागरिकों और सार्वजनिक संसाधनों पर पड़ा है.
प्राकृतिक संसाधनों और संस्थाओं के उपयोग पर टिप्पणी
सुप्रियो भट्टाचार्य ने देश के प्राकृतिक संसाधनों, जंगलों, बंदरगाहों और अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों के प्रबंधन को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण और उनके उपयोग में पारदर्शिता आवश्यक है. साथ ही उन्होंने विभिन्न केंद्रीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए और निष्पक्षता बनाए रखने की जरूरत बताई.
रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता
युवाओं के रोजगार और शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन को लेकर किए गए वादों की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे युवाओं का विश्वास प्रभावित होता है. शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की आवश्यकता है.
विदेश नीति और राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी
प्रेस वार्ता में विदेश नीति, सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक संवाद जैसे विषय भी चर्चा में रहे. सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि देश में स्वस्थ लोकतांत्रिक माहौल और सकारात्मक राजनीतिक संवाद जरूरी है. उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के रुख को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और जवाबदेही की मांग की.

