नोएडा हिंसा पर Rahul Gandhi का बड़ा बयान: ‘श्रमिकों की आखिरी चीख’, महंगाई और सरकार पर तीखा हमला
श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन और हिंसा के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वह देश के श्रमिकों की “आखिरी चीख” है, जिसे लगातार अनदेखा किया गया.

Noida: श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन और हिंसा के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वह देश के श्रमिकों की “आखिरी चीख” है, जिसे लगातार अनदेखा किया गया. उन्होंने मजदूरों की कम आय, बढ़ते किराए और महंगाई के दबाव को इस असंतोष की बड़ी वजह बताया. राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मजदूरों की मांगें कोई लालच नहीं बल्कि उनकी बुनियादी जरूरतें हैं. इस घटना ने न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकार की नीतियों और श्रम कानूनों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है.
महंगाई और कम वेतन पर सवाल
Rahul Gandhi ने कहा कि नोएडा के मजदूरों की स्थिति बेहद कठिन है, जहां ₹12,000 की सैलरी में ₹4,000 से ₹7,000 तक किराया देना पड़ता है. उन्होंने बताया कि मामूली वेतन वृद्धि के मुकाबले किराए और महंगाई में तेज बढ़ोतरी हो रही है. एक महिला मजदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर के दाम बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन आय स्थिर है. इस असंतुलन ने मजदूरों को कर्ज और आर्थिक संकट में धकेल दिया है.
वैश्विक कारणों का भी जिक्र
राहुल गांधी ने महंगाई के पीछे वैश्विक कारणों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध, सप्लाई चेन में बाधा और अंतरराष्ट्रीय टैरिफ वॉर जैसी स्थितियों ने कीमतों को बढ़ाया है. हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों का बोझ बड़े उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा, बल्कि इसका सबसे ज्यादा असर मजदूर वर्ग पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि दिहाड़ी मजदूर, जो रोज कमाकर खाते हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.
लेबर कोड पर उठाए सवाल
Rahul Gandhi ने सरकार के नए लेबर कोड पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि नवंबर 2025 से लागू किए गए इन नियमों के तहत काम के घंटे बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं, जो मजदूरों के लिए कठिन हैं. उन्होंने सवाल किया कि जो मजदूर 12 घंटे काम करने के बावजूद अपने बच्चों की फीस तक कर्ज लेकर भरता है, उसकी मांगों को गलत कैसे ठहराया जा सकता है. उन्होंने सरकार पर बिना संवाद के फैसले लेने का आरोप भी लगाया.
हिंसक प्रदर्शन और हालात
सोमवार को Noida में श्रमिकों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया. औद्योगिक क्षेत्रों में कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. पथराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए. प्रदर्शन के चलते यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और दिल्ली-नोएडा मार्ग पर लंबा जाम लग गया. हजारों यात्री घंटों फंसे रहे, जिससे आम जनजीवन पर भी बड़ा असर पड़ा.
वेतन बढ़ाने की मांग तेज
प्रदर्शन कर रहे मजदूर लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें कम से कम ₹20,000 मासिक वेतन मिलना चाहिए, ताकि वे अपने खर्चों को संभाल सकें. श्रमिकों ने हरियाणा की तर्ज पर वेतन बढ़ाने की मांग भी उठाई है. Noida के विभिन्न सेक्टरों और औद्योगिक इकाइयों में बड़ी संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतरे और नारेबाजी की. यह आंदोलन अब श्रमिक अधिकारों और आर्थिक असमानता के बड़े मुद्दे के रूप में उभरता दिख रहा है.

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