SIR पर सियासी संग्राम, इरफान अंसारी का विरोध ऐलान—निशिकांत दुबे पर निशाना और सदन स्थगन की मांग
“झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस प्रक्रिया का विरोध करने की बात कही है और इसे लेकर राजनीतिक आपत्ति दर्ज कराने का संकेत दिया है. साथ ही उन्होंने सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर प्रतिक्रिया दी.”

Ranchi: बजट सत्र के बीच झारखंड की सियासत एक बार फिर तीखी बयानबाजी से गर्म हो गई है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अप्रैल से प्रस्तावित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विरोध दर्ज कराने की बात कही है. उन्होंने इसे राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित बताया और राज्य में इसके खिलाफ अभियान चलाने की बात कही. साथ ही गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे के एक हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ऐसे मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टता आनी चाहिए. इसके अलावा, मंत्री ने सदन की कार्यवाही में विपक्षी विधायकों की कम उपस्थिति पर चिंता जताते हुए विधानसभा अध्यक्ष से सत्र की कार्यवाही स्थगित करने का आग्रह करने की भी बात कही. इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है.
SIR को लेकर विरोध की घोषणा
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर पार्टी स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई जाएगी. उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को लेकर कई तरह की शंकाएं सामने आ रही हैं और इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद भी हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस विषय को लोकतांत्रिक तरीके से उठाएगी और संबंधित मंचों पर अपनी बात रखेगी. मंत्री ने यह भी कहा कि मतदाता सूची जैसी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की आशंका की गुंजाइश न रहे.
सांसद पर टिप्पणी और सदन की कार्यवाही पर सवाल
मंत्री ने गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में सभी नेताओं को भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की पहचान और ऐतिहासिक संदर्भों पर टिप्पणी करते समय संवेदनशीलता जरूरी है. वहीं विधानसभा की कार्यवाही पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई सदस्य सत्र में अनुपस्थित रहे, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिहाज से चिंता का विषय है. उन्होंने संकेत दिया कि यदि यही स्थिति बनी रही तो अध्यक्ष से सत्र स्थगित करने का आग्रह किया जा सकता है, ताकि सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके.



