Parliament Session: NEET पेपर लीक को लेकर संसद में हंगामा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज
“नीट पेपर लीक मामले को लेकर संसद के मानसून सत्र में जोरदार हंगामा देखने को मिला. विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद परिसर में प्रदर्शन किया.”

Parliament Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट पेपर लीक मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया. विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद के भीतर और बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर छात्रों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. विपक्ष का कहना है कि पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए. वहीं सरकार इस मुद्दे पर अपने रुख का बचाव करती नजर आ रही है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि देशभर के छात्रों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था पर से उठता जा रहा है और इस स्थिति की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेनी चाहिए. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय सरकार केवल मामले को दबाने और जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जवाबदेही तय करने से बच रही है, जबकि लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा हुआ है. विपक्ष का कहना है कि निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के बिना छात्रों का विश्वास दोबारा हासिल करना संभव नहीं होगा.
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी
मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में एकजुट होकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए और उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. विपक्ष का कहना है कि नीट पेपर लीक केवल एक परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है. सांसदों ने आरोप लगाया कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद सरकार प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है. प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई. विपक्षी नेताओं का कहना है कि संसद में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए ताकि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं का समाधान निकाला जा सके.
राम गोपाल यादव ने नए कानून की जरूरत पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद राम गोपाल यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने की बात पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए पहले से ही कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, इसलिए नया कानून लाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है. यादव ने पूछा कि मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी किस एजेंसी की है और अब तक कितने मामलों में ठोस कार्रवाई हुई है. उन्होंने नीट पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित मुख्य आरोपी को लेकर भी कई सवाल उठे हैं और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर विपक्ष लगातार सवाल कर रहा है. उनका कहना था कि यदि मौजूदा कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा, तो केवल नए कानून की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा.
खरगे की मांग: पहले कार्रवाई, फिर संसद में चर्चा
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस गंभीर मुद्दे पर संसद के भीतर बयान देना चाहिए, न कि देर रात वीडियो संदेश जारी कर अपनी बात रखनी चाहिए. खरगे ने मांग की कि संसद में चर्चा शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. खरगे के अनुसार, इन कदमों के बाद विपक्ष शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर संसद में विस्तृत और सार्थक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार रहेगा.


