MLC Election Results 2026: कहीं टूटी मिली बैलट बॉक्स की सील, कहीं फाइलों को लेकर बवाल, पटना से गोरखपुर तक हलचल
MLC Election Results 2026 की मतगणना के बीच बिहार के पटना में फाइलों को लेकर हंगामा हुआ, जबकि गोरखपुर में बैलट बॉक्स की सील टूटी मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी ने शिकायत दर्ज कराई. बिहार, यूपी, कर्नाटक और महाराष्ट्र की 28 विधान परिषद सीटों पर सबकी नजरें टिकी हैं.

MLC Election Results 2026: बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र की विधान परिषद की 28 सीटों पर मतगणना के बीच कई जगहों पर हंगामे की खबरें सामने आई हैं. बिहार के पटना में मतगणना केंद्र के बाहर फाइलों के बंडल को लेकर विवाद हो गया, जबकि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक बैलट बॉक्स की सील टूटी मिलने पर प्रत्याशी ने आपत्ति दर्ज कराई. इस चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबले पर सबकी नजरें टिकी हैं. वहीं, बिहार में अनंत सिंह के समर्थकों ने अपने समर्थित प्रत्याशी की जीत का दावा करते हुए मिठाइयां बांटना शुरू कर दिया है.
चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतगणना
बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए मतगणना हो रही है. इनमें बिहार की आठ, उत्तर प्रदेश की 11, कर्नाटक की चार और महाराष्ट्र की पांच सीटें शामिल हैं. इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर मुकाबला है. राजनीतिक दलों के लिए ये नतीजे अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनके जरिए विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा. एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबले को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है. मतगणना के दौरान अलग-अलग केंद्रों से आ रही खबरों पर भी सबकी नजर है.
बिहार में चार स्नातक और चार शिक्षक सीटें
बिहार की आठ सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. स्नातक सीटों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी शामिल हैं. वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण की सीटों पर मतगणना हो रही है. कर्नाटक में दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल चार सीटें हैं. महाराष्ट्र की पांच सीटों में तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. स्नातक सीटों में औरंगाबाद, पुणे और नागपुर डिवीजन शामिल हैं. इन सभी सीटों के नतीजे संबंधित क्षेत्रों की राजनीतिक तस्वीर और विधान परिषद में दलों की ताकत पर असर डाल सकते हैं.
उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर मुकाबला
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतगणना हो रही है. इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. स्नातक सीटों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी डिवीजन शामिल हैं. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद डिवीजन की सीटें हैं. इन सीटों के चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों में उत्सुकता है. मतगणना के बीच गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बैलट बॉक्स की सील टूटी मिलने की खबर ने भी ध्यान खींचा है. मामले में प्रत्याशी ने आपत्ति जताते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है.
पटना में मतगणना केंद्र के बाहर फाइलों को लेकर बवाल
बिहार की राजधानी पटना में मतगणना केंद्र के बाहर उस समय हंगामा हो गया, जब एक कर्मचारी फाइलों का बंडल लेकर बाहर निकल रहे थे. वहां मौजूद लोगों और यूट्यूबर्स ने कर्मचारी को घेर लिया और फाइलें खोलकर दिखाने की मांग करने लगे. देखते ही देखते मामला बढ़ गया और मौके पर धक्का-मुक्की तथा कहासुनी शुरू हो गई. काफी देर तक चले विवाद के बाद लोगों ने फाइलों के बंडल खोल दिए. इस दौरान कुछ लोगों ने फर्जी वोटिंग के आरोप लगाते हुए नारेबाजी भी की. घटना के बाद मतगणना केंद्र के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
फाइलों में क्या था? निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने दी सफाई
फाइलों के बंडल को लेकर विवाद बढ़ने के बाद निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी को बाहर आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी. वहां मौजूद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि फाइलों में फॉर्म 16 थे. हालांकि, अधिकारी ने इस दावे को खारिज करते हुए बताया कि वे दस्तावेज पीठासीन अधिकारी की डायरी थे, फॉर्म 16 नहीं. फाइलों को मतगणना केंद्र से बाहर ले जाने का कारण क्या था, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी के अनुसार नहीं हुई है. ऐसे में दस्तावेजों को लेकर उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है. घटना के दौरान लगाए गए आरोपों को फिलहाल स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता.
गोरखपुर में बैलट बॉक्स की सील टूटी मिलने पर हंगामा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के दौरान एक बैलट बॉक्स की सील टूटी मिलने से विवाद खड़ा हो गया. जानकारी के मुताबिक, देवरिया जिले के बनकटा क्षेत्र से संबंधित एक बैलट बॉक्स की सील टूटी हुई पाई गई. मामला सामने आते ही मतगणना केंद्र पर हलचल बढ़ गई. हालांकि, जिला प्रशासन ने स्थिति को संभाल लिया. इस घटना के बाद चुनाव प्रक्रिया और बैलट बॉक्स की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे. मतगणना के दौरान ऐसी स्थिति सामने आने से प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जांच की स्थिति अहम होगी.
निर्दलीय प्रत्याशी अजय सिंह ने दर्ज कराई आपत्ति
निर्दलीय प्रत्याशी अजय सिंह ने बैलट बॉक्स की सील टूटे होने पर आपत्ति जताई और चुनाव आयोग से शिकायत की. उन्होंने बताया कि स्ट्रांग रूम से निकला एक बॉक्स सील किया हुआ नहीं था और उसे अलग रख दिया गया. हालांकि, अजय सिंह ने यह संभावना भी जताई कि घटना मानवीय भूल के कारण हुई हो सकती है. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि सील किस परिस्थिति में टूटी या इसका मतगणना प्रक्रिया पर कोई असर पड़ा है या नहीं. मामले में शिकायत के बाद आगे की कार्रवाई और प्रशासन की जांच से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है.
अनंत सिंह के घर बंटने लगी मिठाइयां, समर्थकों ने किया जीत का दावा
बिहार में एमएलसी चुनाव की मतगणना के बीच अनंत सिंह के घर पर मिठाइयां बनाए जाने और समर्थकों के बीच बांटे जाने की खबर सामने आई है. अनंत सिंह के समर्थकों ने नतीजे घोषित होने से पहले ही उत्साह दिखाना शुरू कर दिया. समर्थकों का कहना है कि जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अनंत सिंह को बाहर कर गलत फैसला लिया था. अनंत सिंह इस चुनाव में जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन कर रहे थे. उनके समर्थकों ने दावा किया कि चुनाव में अनंत सिंह समर्थित उम्मीदवार की जीत होगी. हालांकि, यह समर्थकों का दावा है और इसे आधिकारिक चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता.
नतीजों से पहले समर्थकों में उत्साह
अनंत सिंह के समर्थकों की ओर से मिठाइयां बांटना चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बन गया है. मतगणना के दौरान समर्थक अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आए और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया भी दी. हालांकि, अंतिम नतीजे आने से पहले किसी प्रत्याशी की जीत की पुष्टि नहीं की जा सकती. चुनाव परिणाम मतगणना पूरी होने और निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे. ऐसे में अनुज सिंह की चुनावी स्थिति को लेकर फिलहाल समर्थकों के दावों और आधिकारिक नतीजों के बीच अंतर करना जरूरी है. चार राज्यों में चल रही मतगणना के बीच राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नजरें अंतिम परिणामों पर टिकी हुई हैं.

