'लाल माटी' की लड़ाई में झारखंड कनेक्शन: TMC जीती तो हेमंत का ग्राफ ऊपर, BJP जीती तो चंपाई होंगे नया चेहरा?, जयराम IMPACT की भी चर्चा
“2021 में BJP को 23 सीटें देने वाला जंगलमहल 2024 लोकसभा में TMC की तरफ झुका था. अब विधानसभा में फिर आमने-सामने की टक्कर है. लेकिन इस बार लड़ाई सिर्फ बंगाल की नहीं है. ”

By: Samir Sinha
Bawal desk: 2021 में BJP को 23 सीटें देने वाला जंगलमहल 2024 लोकसभा में TMC की तरफ झुका था. अब विधानसभा में फिर आमने-सामने की टक्कर है. लेकिन इस बार लड़ाई सिर्फ बंगाल की नहीं है. पुरुलिया के बाघमुंडी से झाड़ग्राम के बीहड़ों तक की वोटिंग झारखंड की सियासत का तापमान भी तय करेगी.
आंकड़ों से माहौल सेट करें:
जंगलमहल के चार जिलों में बंपर वोटिंग हुई है — पुरुलिया 87.35%, बांकुड़ा 89.91%, पश्चिम मेदिनीपुर 90.70% और झाड़ग्राम 90.53%. रायपुर 91.3%, बिनपुर 91.4% जैसी कुर्मी-आदिवासी बहुल सीटों पर 90% से ज्यादा मतदान 'कुर्मी फैक्टर' की ताकत दिखा रहा है.
हेमंत सोरेन का दांव
झारखंड के CM हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने TMC के लिए जंगलमहल में ताबड़तोड़ रैलियां कीं. कल्पना ने तो स्थानीय कुड़माली-संथाली में भाषण देकर सीधा कनेक्शन जोड़ा. हेमंत ने PM मोदी-BJP पर तीखे हमले किए. जंगलमहल की सियासत सिर्फ कुर्मी फैक्टर से नहीं चलती. झाड़ग्राम में 29.4%, पुरुलिया में 18.5%, बांकुड़ा में 10.9% और प. मेदिनीपुर में 14.9% आबादी अनुसूचित जनजाति की है. बिनपुर, नयाग्राम, रानीबंध, बंडवान जैसी 15 से ज्यादा सीटें ST रिजर्व हैं. यहां संथाल, भूमिज, मुंडा और लोधा समुदाय निर्णायक भूमिका में हैं. झारखंड से सटे होने के कारण इन इलाकों में हेमंत सोरेन को ‘आदिवासी अस्मिता का प्रतीक’ माना जाता है. BJP के ‘ST दर्जा’ वाले दांव से नाराज आदिवासी संगठनों को हेमंत ये संदेश दे रहे हैं कि ‘कुर्मी को ST में शामिल करना जल-जंगल-जमीन के हक पर हमला है’. अगर हेमंत की रैलियों और कल्पना सोरेन के संथाली-कुड़माली संबोधन से आदिवासी वोटर का 8-10% भी TMC की तरफ शिफ्ट होता है, तो 2021 में 1-2 हजार वोट से हारी-जीती 12 सीटों का समीकरण बदल सकता है. इसलिए TMC के लिए हेमंत सिर्फ ‘कुर्मी काउंटर’ नहीं, बल्कि ‘आदिवासी गारंटर’ भी हैं. अगर TMC यहां बढ़त लेती है तो हेमंत का कद INDIA गठबंधन में राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ेगा. वो ममता के बाद पूर्वी भारत का दूसरा बड़ा आदिवासी चेहरा बनकर उभरेंगे.
चंपाई सोरेन की अग्निपरीक्षा
BJP में आने के बाद से चंपाई दा झारखंड में हाशिये पर दिखे. विधानसभा सत्र से दूरी, प्रदेश कार्यालय में कम दिखना और नगर निकाय में नाराजगी की खबरें आईं. लेकिन बंगाल चुनाव में 'कोल्हान टाइगर' ने पूरी ताकत झोंक दी. PM मोदी की सभा में स्वागत से लेकर 'मछली-भात' की तस्वीर तक — चंपाई ने बंगाली सेंटीमेंट छूने की कोशिश की. झारखंड BJP का कोई और बड़ा चेहरा सीमावर्ती इलाकों में इतना एक्टिव नहीं दिखा. अगर चंपाई के प्रचार वाली सीटों पर BJP जीतती है तो पार्टी आलाकमान के लिए संदेश साफ होगा: झारखंड में बाबूलाल मरांडी के बाद चंपाई को ही झारखंड में बीजेपी के सबसे बड़े आदिवासी चेहरे के रूप में पेश करती है.
जयराम महतो का 'JLKM इफेक्ट'
बाघमुंडी, जयपुर जैसी कुर्मी बहुल सीटों पर जयराम महतो की JLKM ने दोनों दलों का खेल बिगाड़ा है. झारखंड में 81 में से 71 सीटों पर लड़कर JLKM ने कुर्मियों के बीच अपनी जमीन साबित की थी. अगर बंगाल में JLKM 1-2 सीट निकाल लेती है या 10 हजार+ वोट काट लेती है, तो झारखंड में जयराम की 'कुर्मी नेता' के तौर पर स्वीकार्यता बढ़ जाएगी. ये BJP और JMM दोनों के लिए खतरे की घंटी है.
SIR का असर भले कम हो, लेकिन ST दर्जे की मांग, बेरोजगारी और 'लक्ष्मीर भंडार' जैसे मुद्दों पर जंगलमहल में 90% वोटिंग बता रही है कि मुकाबला कांटे का है. नतीजे जो भी हों, एक बात तय है — बंगाल का ये चुनाव झारखंड में 2029 की पटकथा लिखेगा. हेमंत का कद बढ़ेगा या चंपाई की वापसी होगी, इसका फैसला EVM में बंद हो चुका है.

