Video: CO की रिपोर्ट में अवैध खनन की पुष्टि, फिर भी कार्रवाई नहीं! गिरिडीह में सिस्टम पर बड़े सवाल
गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के बदडीहा-2 गांव में अवैध पत्थर खनन का मामला सामने आया है, जहां ग्रामीणों ने गैरमजरुआ जमीन पर बिना अनुमति खनन और भारी ब्लास्टिंग का आरोप लगाया है. शिकायत के बाद सीओ ने मौके की जांच कर अवैध खनन की पुष्टि की, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

Giridih: झारखंड में अवैध खनन पर सरकार भले ही सख्ती के दावे करती हो, लेकिन गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड से सामने आया मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है. बदडीहा-2 में गैरमजरुआ जमीन पर कथित तौर पर खुलेआम अवैध पत्थर खनन हो रहा है. स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत पर अंचल अधिकारी (सीओ) ने मौके की जांच कर अवैध खनन की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट भी भेज दी, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई. आरोप है कि लगातार हो रही हैवी ब्लास्टिंग से आसपास के घरों में दरारें पड़ गई हैं, खेत बर्बाद हो रहे हैं और विरोध करने वालों को धमकियां मिल रही हैं. अब सवाल यह है कि जब प्रशासन खुद अवैध खनन की पुष्टि कर चुका है, तब भी जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से पीछे क्यों है?
90 डिसमिल गैरमजरुआ जमीन पर अवैध खनन
गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के बदडीहा-2 स्थित हल्का नंबर-10, प्लॉट नंबर-58 की करीब 90 डिसमिल गैरमजरुआ जमीन पर कथित रूप से अवैध पत्थर खनन किया जा रहा है. स्थानीय निवासी देवनंदन राय ने इस मामले की शिकायत सीओ, एसडीओ, जिला खनन पदाधिकारी और डीसी तक की. शिकायत के बाद सीओ ने मौके पर पहुंचकर जांच की और अपनी रिपोर्ट में अवैध खनन होने की पुष्टि करते हुए एसडीओ को रिपोर्ट भेजी. इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि खनन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और खनन का काम पहले की तरह जारी है.
ब्लास्टिंग से घरों में दरार, खेत बर्बाद
देवनंदन राय का घर और खेत कथित अवैध खनन स्थल के बिल्कुल पास है. उनका आरोप है कि तीन ठेकेदार मिलकर पत्थर खनन करा रहे हैं. लगातार होने वाली भारी ब्लास्टिंग के कारण उनके घर की दीवारों में दरारें आ गई हैं. विस्फोट के दौरान उड़ने वाले पत्थरों से खेत प्रभावित हो गए हैं, जिससे खेती करना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय होने वाली ब्लास्टिंग से पूरा परिवार दहशत में रहता है. देवनंदन राय ने यह भी आरोप लगाया है कि अवैध खनन का विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी जा रही हैं, जिससे उनका परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है.
सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासनिक जांच में अवैध खनन की पुष्टि हो चुकी है, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई. यदि सरकारी रिपोर्ट के बाद भी खनन जारी रहता है तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में अब निगाहें गिरिडीह प्रशासन और खनन विभाग पर हैं कि वे इस मामले में कब प्रभावी कार्रवाई करते हैं और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं.

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