17 अप्रैल को तय होगा हरिवंश नारायण सिंह का सियासी भविष्य: राज्यसभा उपसभापति चुनाव को लेकर सियासत तेज
“राज्यसभा उपसभापति पद के लिए 17 अप्रैल को होने वाला चुनाव सियासी रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. इस चुनाव में हरिवंश नारायण सिंह के राजनीतिक भविष्य पर फैसला होगा, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो चुका है. जबकि विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है और इसे जल्दबाजी बता रहा है.”

Patna: बिहार और राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से 17 अप्रैल का दिन बेहद अहम होने जा रहा है, जब राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए चुनाव होगा. इस चुनाव में हरिवंश नारायण सिंह के सियासी भविष्य पर फैसला होगा. उनका कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो चुका है, लेकिन उन्हें दोबारा इस पद पर लाने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन सक्रिय हो गया है. वहीं विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रहा है और इसे जल्दबाजी बता रहा है. इस बीच राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है, क्योंकि यह चुनाव सिर्फ एक पद तक सीमित नहीं, बल्कि केंद्र की सियासत में शक्ति संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है. 16 अप्रैल को नामांकन और विशेष सत्र के बाद 17 अप्रैल को मतदान होना है, जिस पर अब पूरे देश की नजर टिकी है.
9 अप्रैल को खत्म हुआ कार्यकाल, 10 अप्रैल को फिर शपथ
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था. इसके बाद उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया और 10 अप्रैल को उन्होंने पुनः शपथ ली. यह घटनाक्रम इस बात का संकेत था कि सत्तारूढ़ गठबंधन उन्हें एक बार फिर इस पद पर देखना चाहता है. शपथ ग्रहण के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई और सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई.
17 अप्रैल को चुनाव, 16 अप्रैल नामांकन की आखिरी तारीख
राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार उपसभापति पद के लिए चुनाव 17 अप्रैल को सुबह 11 बजे होगा. इसके एक दिन पहले यानी 16 अप्रैल तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं. इसी दिन राज्यसभा का विशेष सत्र भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें नए सदस्य शपथ लेंगे और अन्य विधायी कार्यों पर चर्चा होगी. इस पूरे कार्यक्रम ने सियासी गतिविधियों को और तेज कर दिया है.
विपक्ष का आरोप—जल्दबाजी में कराया जा रहा चुनाव
विपक्षी दलों ने इस चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार इस चुनाव को जल्दबाजी में कराना चाहती है. उनका कहना है कि जब लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है, तो राज्यसभा में इतनी तेजी क्यों दिखाई जा रही है. वहीं डेरेक ओ'ब्रायन ने भी कहा कि कई सांसद राज्य चुनावों में व्यस्त हैं, ऐसे में चुनाव टालना चाहिए. वाम दलों ने भी इसी तरह की आपत्ति जताई है.
हरिवंश का अनुभव और NDA की रणनीति
हरिवंश नारायण सिंह बिहार से जदयू के वरिष्ठ नेता हैं और दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. वह पहले भी दो बार उपसभापति पद संभाल चुके हैं और सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को संभालने का अनुभव रखते हैं. सत्तारूढ़ NDA उन्हें एक अनुभवी और संतुलित नेता के रूप में देखता है, इसलिए उन्हें फिर से इस पद पर लाने की रणनीति बनाई जा रही है. वहीं विपक्ष इस चुनाव को राजनीतिक संतुलन के नजरिए से देख रहा है.


