Fuel Price Hike: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG भी महंगी, सिर्फ 5 दिन में दूसरी बढ़ोतरी; क्या और बढ़ेंगे दाम?
“देशभर में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है. मंगलवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए. इससे पहले 15 मई को ही दोनों ईंधनों की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. ”

New Delhi : देशभर में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है. मंगलवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए. इससे पहले 15 मई को ही दोनों ईंधनों की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. यानी महज पांच दिनों में दूसरी बार ईंधन महंगा हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता.
पांच दिन में दूसरी बढ़ोतरी
19 मई से लागू नई दरों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. मुंबई में पेट्रोल 107 रुपये के पार निकल चुका है, जबकि कोलकाता और चेन्नई में भी कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. 15 मई को पहली बढ़ोतरी में पेट्रोल-डीजल 3 रुपये प्रति लीटर महंगे किए गए थे, जो लगभग चार साल बाद पहली बड़ी वृद्धि थी. ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में नई दरों के बाद पेट्रोल 98 रुपये से ऊपर और डीजल 91 रुपये से अधिक हो गया है. इसका असर रोजाना सफर करने वाले लोगों, कैब ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर तुरंत दिखने लगा है.
ऑटो-टैक्सी चालकों की लागत बढ़ी
सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, CNG की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. दिल्ली-NCR में CNG पहले ही 2 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई थी और कई शहरों में इसके बाद भी कीमतों में संशोधन हुआ है. कुछ क्षेत्रों में CNG 89 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई है. इसका सबसे ज्यादा असर ऑटो, टैक्सी और छोटे कमर्शियल वाहन चालकों पर पड़ेगा. ड्राइवरों का कहना है कि महीने का ईंधन खर्च हजारों रुपये बढ़ सकता है, जबकि किराया बढ़ाने पर यात्रियों की संख्या कम होने का खतरा रहता है.
अचानक क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम?
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया संकट बताया जा रहा है. क्षेत्रीय संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी में जहां भारत के आयातित कच्चे तेल का औसत मूल्य करीब 69 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं बाद में यह 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में वैश्विक कीमतों में उछाल का असर घरेलू बाजार पर पड़ना लगभग तय माना जाता है.
सरकार ने राहत से किया इनकार
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कंपनियां रोजाना अरबों रुपये का नुकसान झेल रही थीं. ऐसे में कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया. फिलहाल सरकार की तरफ से सब्सिडी या विशेष राहत के संकेत नहीं मिले हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की बढ़ोतरी असल लागत वृद्धि की तुलना में अभी भी सीमित है, यानी आगे और संशोधन संभव हैं.
क्या महंगाई का नया दौर शुरू होने वाला है?
ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता. परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, दूध, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या ये सिर्फ शुरुआत है या आने वाले दिनों में पेट्रोल, डी जल और CNG के दाम और बढ़ेंगे? अंतरराष्ट्रीय हालात देखकर विशेषज्ञ दूसरी संभावना को भी खारिज नहीं कर रहे.


