चलती ट्रेन में फिर बनने लगा खाना! IRCTC ने कई साल बाद शुरू की नई व्यवस्था
“भारतीय रेलवे की कैटरिंग सेवा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने एक बार फिर चलती ट्रेनों में खाना पकाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. ”

New Delhi: भारतीय रेलवे की कैटरिंग सेवा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने एक बार फिर चलती ट्रेनों में खाना पकाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह सुविधा कई साल पहले सुरक्षा और परिचालन कारणों से चरणबद्ध तरीके से बंद कर दी गई थी. लेकिन मौजूदा हालात में बढ़ती चुनौतियों के चलते इसे दोबारा लागू किया जा रहा है. अब खास बात यह है कि खाना गैस सिलेंडर की जगह इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव के जरिए तैयार किया जाएगा, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हो सके.
एलपीजी संकट और सप्लाई बाधा बनी वजह
जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता पर पड़ा है. इसी वजह से रेलवे कैटरिंग सिस्टम में गैस की कमी महसूस की जा रही थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए हर दिन करीब 1,000 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती है. इस संकट को देखते हुए IRCTC ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम को बढ़ावा देने का फैसला किया है.
अब LHB पैंट्री कारों में इलेक्ट्रिक कुकिंग
IRCTC ने LHB पैंट्री कारों में इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव के माध्यम से खाना पकाने की व्यवस्था शुरू की है. कंपनी का कहना है कि अब ट्रेन के अंदर ही सुरक्षित तरीके से बिजली का उपयोग करके भोजन तैयार किया जाएगा. इसके साथ ही बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी इंडक्शन स्टोव और इलेक्ट्रिक किचन सिस्टम लगाए जा रहे हैं. राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में यह व्यवस्था तेजी से लागू की जा रही है. IRCTC के अनुसार, इससे न केवल गैस की खपत कम होगी बल्कि संचालन भी अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनेगा.
रोजाना लाखों यात्रियों को मिलती है सेवा
IRCTC देशभर में लगभग 1,400 ट्रेनों में कैटरिंग सेवाएं प्रदान करता है. कंपनी रोजाना करीब 17 लाख यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है, जबकि सालाना यह संख्या लगभग 58 करोड़ यात्रियों तक पहुंचती है. रेलवे स्टेशनों पर स्थित फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार आउटलेट्स में भी अब इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे कैटरिंग में लगभग 60% खाना अब बिजली आधारित उपकरणों से तैयार किया जा रहा है.
कमाई और मार्जिन पर भी असर
जानकारों के मुताबिक, एलपीजी संकट और बढ़ती लागत का असर IRCTC के कैटरिंग सेगमेंट की कमाई पर भी पड़ा है. वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कैटरिंग बिजनेस का EBIT मार्जिन 10.4% से घटकर 6.3% तक आ गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि लागत बढ़ने के कारण कंपनी को या तो कीमतों में बदलाव करना होगा या फिर वॉल्यूम बढ़ाकर संतुलन बनाना होगा. हालांकि, कीमतों में बदलाव का अंतिम निर्णय रेलवे मंत्रालय के पास होता है.
ऊर्जा संकट ने उजागर की चुनौतियां
28 फरवरी के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया तनाव के कारण तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ा है. दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है. इसी वजह से रेलवे कैटरिंग सिस्टम की निर्भरता और सीमाओं को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है. संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी भी 341 लंबी दूरी की ट्रेनें ऐसी हैं जिनमें पैंट्री सेवा उपलब्ध नहीं है.


