हाईकोर्ट के फैसले के बाद देवेंद्र महतो ने सरकार को चेताया, कहा- भरोसा टूटा तो फिर शुरू होगा छात्र आंदोलन
झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि छात्रों का भरोसा टूटा तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा. महतो ने JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से पारदर्शी कार्रवाई की मांग की.

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट के 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन छात्रों की जिन मांगों को लेकर आंदोलन किया गया था, उन पर न्याय की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है. महतो ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल की गैरमौजूदगी तथा CID जांच रिपोर्ट को प्रभावी तरीके से अदालत के सामने नहीं रखने से कई सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि छात्रों का संघर्ष किसी योग्य अभ्यर्थी की नौकरी छीनने के लिए नहीं है. आंदोलन का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में कथित पेपर लीक, अनियमितता और पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों पर कार्रवाई सुनिश्चित कराना है.
हाईकोर्ट के आदेश का किया सम्मान
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले का वे सम्मान करते हैं. हालांकि, उनके मुताबिक अदालत में चल रही प्रक्रिया के साथ छात्रों की मूल मांगें भी महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि परीक्षा और नियुक्ति से जुड़े विवादों को लेकर छात्र लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं. ऐसे में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर छात्रों की नजर बनी हुई है.
सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
महतो ने सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश किए गए पक्ष को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अटॉर्नी जनरल की अनुपस्थिति और CID की जांच रिपोर्ट को मजबूती से अदालत के सामने नहीं रखे जाने से सरकार की मंशा को लेकर संदेह पैदा होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को कमजोर करने या उसकी गंभीरता कम करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.
भरोसा टूटा तो फिर शुरू होगा आंदोलन
छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार ने छात्रों के साथ भरोसा तोड़ने या मामले को दबाने की कोशिश की, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण रहा है, लेकिन मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वे फिर सड़क पर उतरने को मजबूर हो सकते हैं. उन्होंने आंदोलन को बड़े छात्र आंदोलनों की तर्ज पर आगे बढ़ाने की बात भी कही.
योग्य छात्रों के भविष्य की चिंता
देवेंद्र महतो ने कहा कि छात्रों की लड़ाई किसी निर्दोष या योग्य अभ्यर्थी के खिलाफ नहीं है. उनका कहना है कि मेहनत करने वाले उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिलना चाहिए और पूरी भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कथित पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं की वजह से योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर नहीं पड़ना चाहिए.
44 दिन के आंदोलन और 16 दिन के अनशन का जिक्र
महतो ने आंदोलन के दौरान छात्रों की ओर से किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि मांगों को लेकर 44 दिनों तक आंदोलन चला और 16 दिनों तक अनशन किया गया. अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्र आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सरकार के रुख का इंतजार कर रहे हैं. महतो ने दोहराया कि उनकी मांग ऐसी भर्ती व्यवस्था की है, जिसमें पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिल सके.

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