तेहरान में खामेनेई मुख्यालय के पास भीषण भिड़ंत, MEK के 100 लड़ाके ढेर
तेहरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मुख्यालय के पास ईरान की सुरक्षा बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और विपक्षी संगठन मुजाहिद्दीन-ए-खल्क के बीच भीषण मुठभेड़ हुई. सरकारी दावे के अनुसार 100 से ज्यादा हमलावर मारे गए, जबकि MEK ने ऑपरेशन को सफल बताया है.

ईरान की राजधानी तेहरान में देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मुख्यालय के पास हुई एक बड़ी सुरक्षा मुठभेड़ ने पूरे पश्चिम एशिया में हलचल पैदा कर दी है. सरकार के विरोधी संगठन मुजाहिद्दीन-ए-खल्क (एमईके) और ईरान की ताकतवर सुरक्षा इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के बीच यह झड़प उस समय हुई जब एमईके के लड़ाके कथित तौर पर खामेनेई के संरक्षित परिसर के पास ऑपरेशन की कोशिश कर रहे थे. दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे किए हैं—सरकार कहती है कि हमला नाकाम कर दिया गया, जबकि एमईके इसे सफल ऑपरेशन बता रहा है. इस घटना में 100 से अधिक लड़ाकों के मारे जाने का दावा सामने आया है. इस मुठभेड़ ने ईरान की आंतरिक सुरक्षा, विपक्षी गतिविधियों और विदेशी दखल की संभावनाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मोताहारी कॉम्प्लेक्स के पास टकराव
तेहरान का मोताहारी कॉम्प्लेक्स ईरान की सबसे सुरक्षित सरकारी जगहों में गिना जाता है, जहां सर्वोच्च नेता का दफ्तर, गार्डियन काउंसिल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रमुख संस्थान स्थित हैं. इसी हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र के आसपास एमईके के लड़ाकों और आईआरजीसी के जवानों के बीच मुठभेड़ हुई. सरकारी मीडिया के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने शुरुआती चरण में ही घुसपैठ की कोशिश को रोक दिया. वहीं विपक्षी संगठन का दावा है कि उन्होंने इस क्षेत्र के भीतर तक पहुंच बनाई और कई सरकारी समर्थकों को निशाना बनाया.
100 लड़ाके मारे जाने का दावा, लेकिन आंकड़ों पर विवाद
आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने एमईके के 100 से ज्यादा लड़ाकों को मार गिराया, जबकि संगठन का कहना है कि उसके कई सदस्य मारे गए या हिरासत में लिए गए, लेकिन साथ ही उसने सरकारी पक्ष के भी भारी नुकसान का दावा किया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है. बताया गया है कि झड़प के बाद पूरे इलाके में एम्बुलेंस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखी गई, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
विदेशी समर्थन के आरोप और ऑपरेशन की साजिश
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस ऑपरेशन को विदेशी खुफिया एजेंसियों का समर्थन प्राप्त था. हालांकि ईरान सरकार ने इस पर सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसने विपक्षी समूहों पर बाहरी ताकतों के साथ मिलकर देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है. दूसरी ओर एमईके का कहना है कि यह ऑपरेशन ईरान के अंदर बढ़ते असंतोष का परिणाम है.
ईरान की आंतरिक सुरक्षा और राजनीति पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान पहले से ही आंतरिक असंतोष, आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा है. सुप्रीम लीडर के मुख्यालय के पास इस तरह की मुठभेड़ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार सुरक्षा कड़ी कर सकती है और विपक्षी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई और तेज हो सकती है. इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि ईरान में सत्ता और विपक्ष के बीच संघर्ष अब खुलकर सामने आ रहा है.

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